हरियाणा चुनाव: राजसी दलों ने दिखाए दलित मतदाताओं को मुंगेरी लाल के हसीन सपने

सिरसा(मनमोहित ग्रोवर)। 90 सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा में होडल, मुलाना, नरवाना, साढौला, शाहबाद, कलानौर, झज्जर, गुहला, नीलाखेडी, इसराना, खरखौंदा, रतियां, कालांवाली, उकलाना, बुवानीखेड़ा, बावल व पटौदी विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है, मगर अंबाला संसदीय क्षेत्र में दलित मतदाताओं का अच्छा प्रभाव है। इस संसदीय क्षेत्र में पडऩे वाले विधानसभा क्षेत्र मुलाना तथा साढौरा में 50 से 60 हजार, जगाधारी में 37-38 हजार, यमुनानगर में करीब 30 हजार, नारायणगढ़  में 30 हजार से ज्यादा, अंबाला शहर में करीब 30 हजार तथा अंबाला छावनी में 25 हजार से ज्यादा दलित मतदाता है। हरियाणा में 21 प्रतिशत दलित मतदाता है। कांग्रेस का कभी पुश्तैनी वोट बैंक रहा दलित वोट पिछले कुछ समय से बिखर गया था, जो अब फिर पुरानी डगर की तरफ वापिसी करने लगा है। बसपा ने दलित वोट बैंक में सेंधमारी के कई प्रयास किए है, मगर सफलता मिलती दिखाई न देने पर बसपा ने सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला अपनाते हुए पूर्व सांसद अरविंद शर्मा को बसपा को जिंदा रखने की जिम्मेवारी सौंपी है, जिसमें सफल होने के लिए अरविंद शर्मा को कड़ी मेहनत करनी होगी, क्योंकि दलित मतदाताओं का रूझान कांग्रेस की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। कांग्रेस ने दलित वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व देने के साथ साथ सत्ता में भी समुचित भागीदारी दी है। मौजूदा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर, राज्यसभा सांसद सुश्री शैलजा, शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कांग्रेस फूलचंद मुलाना दलित समाज से है। 15 अक्टूबर को होने वाले हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर  कांग्रेस ने दलित मतदाताओं से सरकारी नौकरियों का बैकलॉग पूरा  करने के लिए  समयबद्ध भर्ती, सफाई कर्मियों के लिए नियमित भर्ती, दलित व पिछड़ा वर्ग के युवाओं का व्यक्तित्व विकास, सफाई कर्मचारी  आयोग का गठन, दलित-पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजना में समयानुसार वृद्धि, पिछड़ा वर्ग कल्याण निगम की स्वतंत्र स्थापना का आइना दलित  मतदाताओं को दिखाया है, जबकि भाजपा ने अनुसूचित जाति आयोग को अधिक शक्तियां देने, दलितों पर होने वाले अत्याचार की घटनाओं का तुरंत निपटारा, आरक्षण से वंचित अनुसूचित जातियों की आबादी के आधार पर लाभ, दलित व पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए छात्रावास का निर्माण, पाल गडरिया व समकक्ष जातियों की अनुसूचित जाति-जनजाति में शामिल करवाना, दलितों के लिए लघु कटीर उद्योगों की स्थापना तथा सफाई कर्मचारियों को नियमित करने का स्वप्र दिखाया है। इनैलो ने भी पिछड़े और अनुसूचित जाति के लोगों को दो लाख रूपये तक के कर्ज माफ, दलितों पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ कड़ा कानून तथा दलित छात्रों के लिए छात्रवृत्ति के साथ हरसंभव सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर दांव खेला है।(प्रैसवार्ता) 

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