निर्दलीय बिगाड़ सकते है राजनीतिक समीकरण

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणवी राजनीति में सरकार बनाने और गिराने में निर्दलीय विधायकों की अहम् भूमिका रही है। वर्तमान में राज्य का राजनीतिक मानचित्र दर्शाता है कि इस बार भी निर्दलीय प्रत्याशी राजनीतिक समीकरण बिगाड़ सकते है। कुछ निर्दलीय तो चुनाव जीतने के लिए, कुछ चुनावी चस्का उतारने, तो कई अपने विरोधियों की रड़क निकालने के लिए चुनावी दंगल में है। हरियाणा में इस बार क्षेत्रीय दलों की बढ़ती संख्या और बहुकोणीय मुकाबलों के चलते राजनीतिक तस्वीर स्पष्ट नजर नहीं दिखाई देती। पिछले विधानसभा चुनाव में प्रदेश में 7 निर्दलीय चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचकर कांग्रेसी सरकार के संकट मोचक बने थे। प्रैसवार्ता को मिली जानकारी के अनुसार हरियाणा की 12वीं विधानसभा के लिए हो रहे चुनाव में 603 निर्दलीय मैदान में है। सर्वाधिक 19 निर्दलीय विधानसभा क्षेत्र से है, जबकि असंध व फतेहाबाद क्षेत्र से 17-17, हिसार से 15, नारायणगढ़, नूंह, शाहबाद, इसराना में कोई नहीं, जबकि कालांवाली तथा रानियां क्षेत्र से एक-एक निर्दलीय चुनावी मैदान में है। इसी प्रकार राज्य के करीब डेढ दर्जन विधानसभा क्षेत्रों में निर्दलीयों का आंकड़ा दहाई से ज्यादा है।

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