पलवल विधानसभा क्षेत्र पर एक रिपोर्ट

पलवल/चंडीगढ़(हर्ष अग्रवाल/प्रैसवार्ता)। हरियाणा के पलवल को 15 अगस्त 2008 को 21 वें जिला बनाने की घोषणा की गई थी इससे पहले यह जिला फरीदाबाद जिले में था , लेकिन लोकसभा क्षेत्र के हिसाब से ये अब भी जिला फरीदाबाद लोकसभा के तहत आता है। पलवल विधानसभा में 63 गांव और हैै। मुख्य शहर पलवल है जिसमें 31वार्ड हैं और नगर पालिका से बढ़ा कर इसको अब नगरपरिषद का दर्जा दिया गया है।  पलवल का नाम प्लाम्बासुर राक्षस के नाम पर पड़ा था जो यहां राज करता था जिसका वध भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम (दाउजी ) ने किया था और उस की नगरी को तहस नहस करते पलट दिया था जिसके अवशेष आज भी मौजूद हें और जिसे अब ढेर मोहल्ला कहा जाता है। इसी के चलते यहां प्राचीन दाउजी का मन्दिर है। पलवल एक एतिहासिक नगर है जिसका नाम कोरव और पांडवों से भी जुड़ा है लेकिन 10 अप्रेल 1919 को पलवल के रेलवे स्टेशन पर महात्मा गांधी की पहली गिरफ्तारी पलवल में उस वक्त हुई थी जब गांधी जी अंग्रेजो के रोलट एक्ट कानून  के विरोध में अमृतसर जा रहे थे तो अंग्रेजों ने उन्हें पलवल के रेलवे स्टेशन पर उतार कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इसी याद में पलवल में गांधी आश्रम की स्थापना की गई थी जिसका उद्घाटन नेता सुभाषचंद बोस ने 1938 में किया था। गांधी आश्रम में गांधी जी दुर्लभ चित्रों  का संग्रह है जिसे फोटो गेलरी में सुसज्जित करके रखा गया है। पलवल की ज्यादातर भूमि उपजाऊ जमीन हैं और मुख्य आय का क्षेत्र खेती और व्यवसाय है। पलवल में  बस स्टैण्ड, बीडीओ ब्लॉक, तहसील कार्यालय के साथ  साथ , 50बेड का पुराना हॉस्पिटल है जिसे अब 100 बेड  का कर दिया गया है और जिसके लिए अब बहुत बड़े भवन का नया निर्माण किया जा रहा है। इतना ही नहीं जिला बनने की घोसना के बाद बहुत ही शानदार न्यायिक भवन जनता के अधीन हो गया है और लघु सचिवालय भी शुरू हो गया है। पलवल में रेलवे स्टेशन हैं जो की दिल्ली और बॉम्बे और उसके साथ लगने वाले सभी बड़े बड़े शहरों को जोड़ता है। इस रेलवे स्टेसन से रोजाना दिल्ली और दूसरी जगहों के लिए नौकरी पर जाने के रोजाना 35 से 40 हज़ार लोग आते और जाते हैं। नया जिला बनने के बाद यहां काफी बजट आया है और नये जिले के हिसाब से नये नये निर्माण भी हो रहे हैं जिनमें मुख्य सरकारी कॉलेज का निर्माण आदि प्रमुख हैैं।
पलवल विधानसभा के मुद्दे
पलवल विधानसभा क्षेत्र में कोई भी उद्योग स्थापित नहीं है। यहां के लोग खेती और व्यवसाय पर आधारित है। पलवल विधान सभा छेत्र के लोगों के मन में वर्तमान  सरकार के प्रति भारी  नाराजगी है।  छेत्र में नहीं हुए विकास कार्य। न हीं समय पर बिजली मिलती है और नहीं समय पर सिचाई के लिए पानी। पीने के पानी की बात तो दूर की बात है। लोगों ने कहा  कि इस सरकार  के सबसे  बढ़ा विकास का मुद्दा  आने वाले विधान सभा चुनाबों में रहेगा। लोगों ने कहा कि जिले में बेरोजगारी बढ़ अब विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। जबकि इनेलो ने उन पर दूसरी बार विश्वास व्यक्त कर इनेलो की टिकट दोबारा थमा दी है।
पलवल विधान सभा का राजनैतिक इतिहास
पलवल विधान सभा की सीट पर तेजतरार नेता करण सिंह दलाल सबसे ज्यादा लम्बे समय तक काबिज रहे हैंं। वे 1 991 से लेकर 2009 तक लगातार चार बार अलग अलग पार्टियों से विधायक बनते रहे और इतिहास है वह जितनी भी बार जीते अलग अलग चुनाव चिन्हों पर चुनाव जीते। 1991 में और 1996 में अलग अलग चुनाव चिन्हों पर हरियाणा विकास पार्टी से विधायक बने और 1996 के कार्यकाल में वक केबिनेट मंत्री भी रहे। 2006 में वह हरियाणा सुधार आयोग के अध्यक्ष भी बने। 2000 में उहोने अठावले की पार्टी आर पी आई की टिकट से चुनाव लड़े और जीते। 2005 के चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री भजन लाल के इशारे पर कांग्रेस में शामिल हो गये और उन्हें 2005 के चुनाव के लिए कांग्रेस की टिकट मिल गयी और विधायक बन गये। हालांकि 2009 में भी उन्हें उम्मीद के मुताविक कांग्रेस की टिकट मिली लेकिन लोगों ने कर्ण दलाल को हरा दिया। फिलहाल वे मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के समधी हैं और चुनाव हारने के बाद भी जिले में उनके बिना पत्ते भी नहीं हिलता। पार्टी और प्रशासन पर उनका पूरा कब्ज़ा है। जिसके चलते जिले से कांग्रस पार्टी पूरी तरह समाप्त हो गई है फिलहाल कांग्रेस का वरकर ढूंढे से भी नहीं मिलता। यहाँ केवल उनके निजी समर्थक हैं न कि कांग्रस पार्टी के। झूठे मुकदमें बनाने में श्री दलाल अच्छे खासे बदनाम है, जिसके चलते पूरा विधान सभा क्षेत्र खफा है और उनसे हिसाब किताब करने को आतुर बैठा है।
पलवल  विधानसभा का जातिगत समीकरण -इस विधान सभा में 196507  वोटें हैं
करीब 25  से 27  हज़ार जाट समुदाय का वोट का अनुमान  है।
करीब 19 से 20  हज़ार गूजर समुदाय का वोट का अनुमान  है।
करीब 12  से 14 हजार पंजाबी समुदाय का वोट का अनुमान  है।
करीब 18   से 20  हज़ार अग्रवाल  समुदाय का वोट का अनुमान  है।
करीब 15  से 18 हज़ार ब्राह्मण समुदाय का वोट का अनुमान  है।
करीब 10  से 12  हज़ार राजपूत समुदाय का वोट का अनुमान  है।
करीब 8 से 10 हज़ार मुसलमान समुदाय का वोट का अनुमान  है।
करीब 60  से 70  हज़ार हरीजन बी सी ,एस सी और अन्य जातियों के वोटों का अनुमान है।
                                   

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