कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत अपनों की बदौलत ही जब्त

सिरसा(सं)। आपसी कलह और भीतरघात के चलते कांग्रेस को मात्र 15 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है। 2005 में कांग्रेस 67 विधायक लेकर सत्ता में आई थी और मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा विधायक बने थे। 2009 में कांग्रेसी विधायकों का आंकड़ा 40 तक ही सिमट कर रह गया था, मगर कांग्रेस आलाकमान ने हुड्डा पर फिर विश्वास दिलाया, मगर 2014 के चुुनाव में कांग्रेसी विधायकों की संख्या 15 पर सिमट कर रह गई। प्रदेश में हुड्डा ने अपने कार्यकाल में कांगेस को इस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया कि कांग्रेस पक्षीय होते हुए मतदाता कांग्रेस को आपसी कलह से न निपटने का खामियाजा देने पर मजबूर हो गए। सिरसा क्षेत्र में हुड्डा के नजदीकियों ने हलोपा सुप्रीमों गोपाल कांडा के लिए वोट डलवाए, क्योंकि कांग्रेस प्रत्याशी हुड्डा की पसंदीदा नहीं थे। प्रदेश प्रवक्ता टैलीविजनों पर कांग्रेस राग अलापते रहे, जबकि अपने क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार गोबी खोदते रहे। कांग्रेस पार्षद किशन सिंगला जलपान कांग्रेस प्रत्याशी के लिए करते देखे गए, मगर मतदान के समय समर्थकों के साथ इनैलो मेें शामिल हो गए। भूपेश मेहता टिकट से वंचित रहने पर कांग्रेस प्रत्याशी के विरोध में भीतरघात करते रहे। ऐसी राजनीतिक परिस्थितियों ने कांग्रेस प्रत्याशी नवीन केडिया की जमानत जब्त करवा दी। हुड्डा की बदौलत ''काली भेडे" कांग्रेस का राजनीतिक जनाजा निकालने में न सिर्फ सक्रिय रही, बल्कि सफल भी हुई।

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