बसपा की राष्ट्रीय पार्टी के दर्जे पर संकट के बादल

सिरसा(प्रैसवार्ता)। बसपा की राष्ट्रीय दल की मान्यता पर संकट के बादल मंडराने लगे है, क्योंकि बसपा हरियाणा तथा महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव में अपेक्षित जीत हासिल नहीं कर सकी, जिससे उसका राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा कायम रह सकता था। इस संदर्भ में चुनाव आयोग किसी भी समय अपने औपचारिक निर्णय की घोषणा कर सकता है। बसपा ने हरियाणा की सभी 90 सीटों तथा महाराष्ट्र की 288 में से 260 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। बसपा को एक मात्र जीत हरियाणा की पृथला से मिली है, जहां बसपा के टेक चंद शर्मा ने भाजपा के नैनपाल रावत को 1179 वोटों से पराजित किया है।  लोकसभा चुनाव में अपना खाता खोलने में असफल रही बसपा को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा बरकरार रखने के लिए इन दोनों चुनावों में दो-दो सीटों पर जीत हासिल करनी जरूरी थी। लोकसभा चुनाव उपरांत चुनाव आयोग ने बसपा सुप्रीमों मायावती को राष्ट्रीय मान्यता रद्द करने का नोटिस दिया, मगर मायावती ने हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का हवाला देकर कुछ समय जरूर हासिल कर लिया था। राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा समाप्त होते ही बसपा को एक चिन्ह पर चुनाव लडऩे, ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर चुनाव प्रचार करने, मुफ्त मतदाता सूची प्राप्त करने जैसी सुविधाओं से हाथ धोना पड़ेगा। हरियाणा में जगाधारी से बसपा विधायक और डिप्टी स्पीकर अकरम खान चुनाव हार गए है। बसपा हरियाणा चुनाव में मात्र 04.04 प्रतिशत ही वोट हासिल कर पाई है, जिससे संकेत मिलते है कि दलित मतदाताओं का दलित नेत्री से मोहभंग हो गया है। मुख्यमंत्री पद के बसपा उम्मीदवार अरविंद शर्मा यमुनानगर और जुलाना से चुनाव हार गए है, जिस पर बसपा ने ब्राह्मण कार्ड खेला था। बसपा ने सतीश चंद मिश्रा, मायावती, बृजेश पाठक जैसी दिग्गजों को हरियाणा में जमीन तैयार करने की जिम्मेवारी सौंपी, मगर हरियाणवी मतदाताओं ने बसपा के इन दिग्गजों के पैरों से जमीन सरका दी। मायावती ने हरियाणा में जाट मतदाताओं पर बरसते हुए गैर जाट मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की, मगर सफलता नहीं मिली। महाराष्ट्र में भी बसपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। बसपा सुप्रीमों ने कई रैलियां की, मगर खाता तक नहीं खोल पाई। बसपा को महाराष्ट्र को 02.02 प्रतिशत वोट ही मिले है।

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