कराधान विभाग ने सिगरेट के फर्जी बिलों पर किया 2000 करोड़ का रिफंड!

सिरसा(प्रैसवार्ता)। आबकारी एवं कराधान विभाग सिरसा के भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से सिरसा ने टैक्स चोरी में नए आयाम स्थापित कर दिए हैं। अधिकारियों की मिलीभगत की वजह से अकेले सिरसा जिला में फर्जी बिलों पर 2000 करोड़ रुपए से अधिक का रिफंड किया गया है। जितनी पूरे उत्तर भारत में सिगरेट की खरीद नहीं की गई उससे कहीं अधिक सिगरेट की खरीद अकेले सिरसा में दर्शाई गई?है। सिगरेट की फर्जी खरीद बेच करके कराधान विभाग से करोड़ों रुपए का रिफंड वसूला  गया है। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से अकेले मंडी क्षेत्र में 300 से अधिक फर्जी फर्में संचालित की जा रही हैं। 
तहकीकात में यह तथ्य सामने आया है कि फर्जी?फर्मों की सिरसा जन्मस्थली है। आबकारी एवं कराधान विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों ने यहां दो, चार, पांच नहीं बल्कि सैकड़ों फर्मों को जन्म दिया। ऐसी फर्मों का रजिस्ट्रेशन किया गया जिनका जमीनी स्तर पर कोई आधार नहीं, कोई ठिकाना नहीं, कोई दुकान नहीं, कोई कार्यालय नहीं, कोई फैक्ट्री नहीं। ऐसी फर्मों ने करोड़ों रुपए की खरीद कर डाली और कराधान विभाग से करोड़ों रुपए का टैक्स रिफंड भी ले लिया। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की वजह से अकेले सिरसा में दो हजार करोड़ से अधिक का रिफंड घोटाला घटित हुआ है। हाल ही में एक फर्म को 60 लाख से अधिक का टैक्स रिफंड किया गया। 
सूत्र बताते हैं कि टैक्स की चोरी करने वाले फर्जी फर्म संचालकों द्वारा आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों से मिलकर पहले फर्मों का रजिस्ट्रेशन करवाया जाता है और फिर टैक्स चोरी के धंधे को अंजाम दिया जाता है। अनेक फर्मों का तो काम ही केवल और केवल टैक्स चोरी पर आधारित है। बताया जाता है कि गेहूं और नरमा उत्पादन में अव्वल स्थान रखने वाले सिरसा में सिगरेट?की इतनी खरीद दर्शाई जाती है कि जितनी पूरे उत्तर भारत में नहीं। सिरसा की इन फर्जी फर्मों द्वारा गुडग़ांव और फरीदाबाद से करोड़ों रुपए की सिगरेट की खरीद दर्शाई?जाती है। सिगरेट की खरीद पर दो प्रतिशत सीएसटी देय है। जबकि वेट 21 प्रतिशत है। 
फर्जी फर्म संचालकों द्वारा सिरसा में करोड़ों रुपए की सिगरेट की खरीद दर्शाकर नोहर, भादरा, हनुमानगढ़, गंगानगर व राजस्थान के अन्य कस्बों में बनाई?अपनी ही फर्जी फर्मों के नाम पर बिल जारी कर दिए जाते हैं और बदले में कराधान विभाग से 21 प्रतिशत टैक्स के रिफंड का दावा ठोक दिया जाता है। सूत्र बताते हैं कि कराधान विभाग के अधिकारियों को टैक्स रिफंड पर 20 प्रतिशत कमीशन हासिल होता है। फर्जी फर्म संचालकों द्वारा टैक्स रिफंड पर भारी भरकम कमीशन दिए जाने की वजह से कराधान विभाग के अधिकारी भी दौड़-दौड़ कर रिफंड?में सहयोग करते हैं।?यही वजह है कि सिरसा में पिछले कुछ वर्षों के दौरान 2000 करोड़ से अधिक का टैक्स रिफंड किया गया है। 
सिगरेट के नाम पर टैक्स चोरी का कारोबार इतना फल-फूल चुका है कि अकेले अनाजमंडी क्षेत्र में 300 से अधिक फर्जी फर्में सक्रिय हैं। इन फर्मों द्वारा केवल सिगरेट की बिलिंग का ही कारोबार किया जाता है। फर्जी फर्म के संचालन के लिए फर्म संचालकों द्वारा अपने अते-पते भी बड़े अजीब दिए हुए हैं। फर्जी?फर्म संचालन के लिए लालवेयर हाऊस के पास तो कोई पुरानी हाऊसिंग बोर्ड?में मकान के पीछे अपना पता बताता है। कई फर्में तो अकेले सिरसा क्लब के नजदीक दर्शाई गई हैं। सवाल यह है कि लाल वेयर हाऊस के पास ऐसी कौन सी औद्योगिक इकाई?है जहां करोड़ों रुपए का व्यापार होता है। हाऊसिंग बोर्ड कालोनी में ऐसा कौन से करोड़पति का निवास और दफ्तर है जोकि करोड़ों रुपए का लेन-देन करता है। यह सवाल आम आदमी के जहन में अवश्य उठते हैं मगर आबकारी एवं कराधान विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों को इसमें कुछ भी गलत नजर नहीं आता। यही वजह है कि कागजों में संचालित फर्जी?फर्मों पर नकेल कसने की बजाय कराधान विभाग के अधिकारी अपने कमीशन के चक्कर में करोड़ों रुपए का रिफंड इन फर्मों को करते हैं।

एक करोड़ पर 21 लाख मिलता है रिफंड
कराधान के नियमानुसार एक करोड़ की सिगरेट खरीद पर फर्जी फर्म संचालक 21 लाख रुपए के रिफंड का दावा करते हैं। फर्जी फर्म संचालकों द्वारा न सिगरेट खरीदी जाती है और न ही सिगरेट बेची जाती है। केवल सिगरेट खरीदने का बिल लिया जाता है और राजस्थान में बनाई अपनी ही फर्मों के नाम बिल काटा जाता है। इस प्रकार बिना किसी लेन-देन के, बिना किसी वस्तु के उत्पादन के फर्जी फर्म संचालक करोड़ों रुपए टैक्स की चपत सरकार को लगाते हैं।

ट्रेजरी खोल सकती है पोल
खजाना कार्यालय फर्जी फर्म संचालकों व कराधान विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत की पोल खोल सकता है। कराधान विभाग से करोड़ों रुपए का रिफंड खजाना कार्यालय (ट्रेजरी) के माध्यम से किया जाता है। ट्रेजरी विभाग का यदि रिकार्ड खंगाला जाए तो पिछले पांच वर्षों में दो हजार करोड़ से अधिक के रिफंड साबित हो सकता है। यही नहीं ट्रेजरी के रिकार्ड से यह भी साबित हो सकता है कि किस फर्म को कितनी-कितनी राशि रिफंड के रुप में हासिल हुई। यह भी ज्ञात हो सकता है कि करोड़ों रुपए का रिफंड हासिल करने वाली फर्मों की वास्तविक स्थिति क्या है? इन फर्मों द्वारा क्या धंधा किया जा रहा है? कौन सा औद्योगिक कार्य किया जा रहा है? क्या माल की खरीद की गई और क्या माल बेचा गया? 

उपायुक्त दें ध्यान
सिरसा में टैक्स रिफंड के फर्जीवाड़े पर उपायुक्त को ध्यान देना चाहिए। कराधान विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से बनी फर्जी फर्में हर वर्ष करोड़ों रुपए का रिफंड सरकार से हासिल कर रही हैं। फर्जी फर्मों की वजह से सरकार को करोड़ों रुपए के टैक्स की चपत लग रही है। सिगरेट खरीद के मामले से ही यह स्पष्ट है कि टैक्स की चोरी किस प्रकार की जा रही है। क्या यह संभव है कि पूरे उत्तर भारत से अधिक अकेले सिरसा में सिगरेट की खपत हो।

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