यूएसकॉनः इंडियन फेडरेशन ऑफ अल्ट्रासाउंड इन मेडिसिन एंड बायोलॉजी का 23वां सालाना सम्मेलन दिल्ली में शुरू

नई दिल्ली(शुक्ला)। इंडियन फेडरेशन ऑफ अल्ट्रासाउंड इन मेडिसिन एंड बायोलॉजी के 23वें सालाना सम्मेलन यूएसकॉन-23 का शुभारंभ आज मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज सभागार में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के स्वास्थ्य सचिव लव वर्मा ने किया जबकि इस मौके पर फेडरेशन के अधिकारी और मीडया के कई सदस्य भी मौजूद थे।  इस तीन दिवसीय सम्मेलन में कार्यशालाओं, संगोष्ठियों, व्याख्यानों, फ्री पेपर, पोस्टर प्रजेंटेशन और पैनल चर्चाओं का भी आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष यूएसकॉन-23 अंतरराष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय स्तर के कई जाने-माने चिकित्सकों को आकर्षित करने में सफल रहा है। ये सभी चिकित्सक विभिन्न क्लिनिकल समस्याओं पर भागीदारों के साथ चर्चा करेंगे और उन्हें समग्र जानकारी से अवगत कराएंगे।  आईएफयूएमबी के अध्यक्ष डॉ. राहुल सचदेव ने कहा, “यूएसकॉन चिकित्सा उद्योग का एक बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम है और इस वर्ष हम सम्मेलन के 23वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। यह वाकई अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। हमें उम्मीद है कि सभी प्रतिनिधि ज्ञान साझा करने वाले इस मंच से लाभान्वित होंगे और वे अल्ट्रासाउंड उद्योग की नई-नई परंपराओं से भी अवगत होंगे। इस वर्ष हमने अल्ट्रासोनोग्राफी में इस्तेमाल होने वाली नई टेक्नोलॉजी पर खास जोर दिया है।”
                                सम्मेलन में हांगकांग के प्रो. अनिल टी. आहूजा, बेल्जियम के प्रो. जेन डेप्रेस्ट, स्वीडन के प्रो. लिल वैलेंटिन, अमेरिका के प्रो. निर्विकार दहिया, यूएई के डॉ. रवि के. कदासने और ब्रिटेन के डॉ. राकेश सिन्हा जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई ख्यातिप्राप्त शिक्षाविद भी शामिल होंगे। राष्ट्रीय स्तर के शिक्षाविदों में दिल्ली, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, पंजाब, गुजरात और अन्य भारतीय राज्यों की प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी।  सम्मलेन के जरिये प्रतिनिधियों को अल्ट्रासाउंड के विभिन्न विषयों और अल्ट्रासोनोग्राफी में हाल की परंपराओं और तरक्कियों के बारे में अपना ज्ञान बढ़ाने का एक अवसर प्रदान किया जाएगा। ज्ञान बढ़ाने वाली कई अन्य कार्यशालाओं के अलावा इस वर्ष कार्यशाला में स्त्रीरोग विज्ञान का लाइव केस भी दिखाया जाएगा जिसमें सामान्य और दोषपूर्ण बदलावों, बांझपन में कलर डॉपलर, 3डी और 4डी एप्लीकेशंस, एनोमलीज स्कैन एंड कार्डियक इवैल्यूशन वर्कशॉप, फेटल ग्रोथ और कलर डॉपलर वर्कशॉप तथा कई अन्य विषयों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा सम्मेलन में ‘रोटेटर कफ के निर्धारण के लिए अमेरिका पर्याप्त है’, ‘सस्पेक्टेड यूरेटेरिक कोलिक के लिए अमेरिका पर्याप्त है’ तथा इसी तरह के कई अन्य विषयों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा प्रसूति विज्ञान, स्त्रीरोग विज्ञान तथा बांझपन में होने वाले अल्ट्रासाउंड पर ट्रेजर हंट क्विज का आयोजन किया जाएगा तथा भाग्यशाली विजेता को एक आई-पैड मिनी दिया जाएगा। 

आईएफयूएमबी के बारे में  
इंडियन फेडरेशन ऑफ अल्ट्रासाउंड इन मेडिसिन एंड बायोलॉजी (आईएफयूएमबी, जिसे पहले इंडियन सोसायटी ऑफ मेडिकल अल्ट्रासाउंड के नाम से जाना जाता था) की स्थापना नायर हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्टों, रेडियोलॉजिस्टों तथा गायनकोलॉजिस्टों के एक समूह द्वारा सन 1978 में की गई थी। डॉ. के. डी. शाह, डॉ. सी. वी. वंजानी, डॉ. सी. वी. शाह, डॉ. के. जी. नायर (सभी कार्डियोलॉजिस्ट) और डॉ. सुमन दफ्तरी और डॉ. आर. आर. पई (रेडियोलॉजिस्ट) तथा डॉ. रोहिणी मर्चेंट एवं डॉ. रावल (गायनकोलॉजिस्ट) ने एक ऐसी संस्था बनाने की पहल की थी जहां अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल करने वाले सभी विशेषज्ञ एक साझा मंच पर एकजुट हो सकें और अल्ट्रासाउंड के इस्तेमाल में प्रशिक्षण पर चर्चा एवं सुझाव दे सकें।

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