पंजाब में भाजपा का सिख कार्ड: अकाली दल के लिए खतरें की घंटी

सिरसा(प्रैसवार्ता)। लोकसभा चुनाव उपरांत महाराष्ट्र तथा हरियाणा में सत्ता संभालने वाली भाजपा ने पंजाब में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए है, क्योंकि भाजपा की सहयोगी अकाली दल में हरियाणा विधानसभा चुनाव में अकाली दल ने भाजपा प्रत्याशियों का विरोध करके गठबंधन में खटास पैदा कर दी है, जिससे चलते भाजपा के शीर्ष नेतृत्च में हरियाणा की तर्ज पर पंजाब में अपना अलग वजूद बनाने के लिए एक योजना बनाकर उस पर अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। भाजपा के सूत्रों मुताबिक पार्टी प्रदेश में अपनी पहचान हिंदू पार्टी  की बजाए हर वर्ग और जाति को साथ लेकर अपनी पहचान में बदलाव लाना चाहती है, जिसके लिए भाजपा ने अकाली दल के प्रभाव क्षेत्र वाले ग्रामों में दस्तक दे दी है। भाजपा एक वर्ग इस बात का पक्षधर है कि पंजाब में भाजपा की कमान सिख नेता को सौंपी जाए, ताकि पंजाब के बाहुल्य सिख आंकड़ों को भाजपा से जोड़ा जाए। इस कड़ी के अंतर्गत पूर्व सांसद नवजोत सिधु-प्रदेश राजनीति में सक्रिय हो गए है। पंजाब में भाजपाई पकड़ को मजबूत करने के लिए भाजपाई प्रयास से अकाली दल-भाजपा की एक लंबे समय से चल रही ऑख मिचौली को राजनीतिक पंडित अकाली दल के लिए खतरे की घंटी मान रहे है। दूसरी भाजपा ने सभी वर्गों को साथ जोडऩे के साथ ग्रामीण क्षेत्रों को अपना फोक्स बना लिया है। नवजोत सिधु द्वारा पडौसी राज्य हरियाणा के विधानसभा चुनाव में अकाली दल पर की गई निशानेबाजी पंजाब भाजपा को एक संजीवनी देने के रूप में ली जाने लगी है।  सिधू पंजाब के भाजपाईयों से भले ही मतभेद रखते हो, मगर अकाली दल पर आरोपों की बौछार ने मतभेदी भाजपाईयों में भी एक आशा की किरण दिखा दी है, क्योंकि पंजाब में भाजपाई एक लंबे से गठबंधन की घुटन महसूस करते आ रहे है। सूत्रों के मुताबिक पंजाब में भाजपाई ग्राफ बढ़ाने के भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने राष्ट्रीय नेता स. आरपी सिंह तथा प्रांतीय उप प्रधान राजेंद्र मोहन सिंह छीना और नवजोत सिधू की कमेटी बना दी है।  आर पी सिंह वर्तमान में दिल्ली से भाजपा विधायक है, जिन्हें बतौर सिख नेता उभारना चाहती है। भाजपाई विधायक सिंह की पंजाब की राजनीति में बढ़ रही दिलचस्पी संकेत देती है कि वह पंजाब में भाजपाई सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है। इसी प्रकार पूर्ण सिख स. राजेंद्र मोहन सिंह छीना भी पिछले काफी समय से भाजपा हाईकमान को समर्पित है तथा उन्हें सक्रिय करके भाजपा जट सिख मतदाताओं की सोच में बदलाव कर सकती है। छीना ने अमृतसर संसदीय चुनाव में भाजपाई दिग्गज अरूण जेतली का साथ दिया था, क्योंकि उनका ऐतिहासिक खालसा कॉलेज गर्वनिंग कौंसल तथा इंडियन अकैडमी ऑफ फाईन आर्टस जैसी महान संस्थाओं से जुुड़े होने तथा स्वच्छ छवि के चलते सिख मतदाताओं पर अच्छा प्रभाव है। स. छीना ही एकमात्र ऐसे सिख भाजपाई है, जिनका ग्रामीण तथा शहरी क्षेेत्रों में अच्छी पकड़ है,मगर नवजोत सिंह से छत्तीस का आंकड़ा है, जिसे दूर करने के लिए भाजपाई शीर्ष नेतृत्व द्वारा प्रयास शुरू कर दिए गए है। भाजपा के पंजाब में सिख कार्ड को अकाली दल के लिए खतरे की घंटी के रूप में देखा जाने लगा है। 

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