अकाली-भाजपा तालमेल पर ''ग्रहण" लगने के आसार

डबवाली(प्रैसवार्ता)। अगले महीने पंजाब में होने वाले नगर निगमों के चुनाव को लेकर अकाली दल व भाजपा के रिश्तों में खटास उस समय शुरू हो गई थी, जब भाजपा ने अकाली दल से आधी सीटें मांग ली है। प्रदेश के दस नगर निगमों में पांच की भाजपाई मांग अकाली दल स्वीकार करता है या नहीं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। भाजपा ने अपने दम पर हरियाणा तथा महाराष्ट्र में विजयी परचम लहराते ही पंजाब में तेवर दिखाने शुरू कर दिए है। पंजाब भाजपा के पूर्व प्रभारी दलित नेता व मौजूदा केंद्रीय मंत्री प्रौ. राम शंकर कठेरिया का यह कहना कि पंजाब में लोकतंत्र की हत्या हो रही है, इसलिए भाजपा स्वच्छ वातावरण व प्रशासन देगी, संकेत देते है कि अकाली दल-भाजपा गठबंधन की गांठ ढिल्ली हो रही है। भाजपा पंजाब के बदलते तेवरों से लगता है कि अब वह अकाली दल के दवाब में नहीं रहेगी, जिसके लिए भाजपा ने बराबर की भागीदारी का राग अलापना शुरू कर दिया है। भाजपा का युद्ध स्तर पंजाब में सदस्यता अभियान का रूझान ग्रामीण क्षेत्रों की तरह बढ़ता देख अकाली दल की भौहें तन गई है, क्योंकि भाजपा के इस अभियान से कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध की बजाए अकाली दल का प्रभावित होना यकीनी माना जा रहा है।  भाजपा से पूर्व अकाली दल का बसपा से तालमेल था और यदि भाजपाई तेवरों में बदलाव न आया, तो अकाली दल बसपा से भी हाथ मिला सकता है, क्योंकि बसपा के दलित वोट बैंक पर अकाली दल की तीखी नजरें है। भाजपा का शहरी मतदाताओं व व्यापारी वर्ग  पर मजबूत पकड़ को देखते हुए अकाली दल ने शहरी व व्यपारी मतदाताओं में भी सेंधमारी शुरू कर दी  है। इसका प्रमाण उद्योगपति राजेंद्र गुप्ता को अकाली दल का महासचिव बनाना है। राजनीति किस समय, क्या रूप लेकर स्थिति में बदलाव ला दें, कुछ नहीं कहा जा सकता। इसलिए अकाली दल तथा भाजपा ने अपने बलबूते पर चुनावी समर में उतरने के लिए प्रयास शुरू कर दिए है। भाजपा को उम्मीद है कि डेरा सच्चा सौदा का समर्थन उन्हें फायदा पहुंचा सकता है। भाजपाई दिग्गज एल के आडवाणी तथा संघ प्रमुख मोहन भागवत की राधा स्वामी समुदाय के प्रमुख से मुलाकात ने राजनीतिक समीकरणों में उथल-पुथल मचा दी है। संघ प्रमुख की संत बलजीत दादूवाल से मुलाकात भी कई मायने रखती है, क्योंकि दादूवाल का बादल से छत्तीस का आंकड़ा है, जिसे भाजपा कैश करना चाहेगी। भाजपा ने दो वर्ष बाद पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए शतरंग बिछा दी है और मोदी लहर के सहारे भाजपा उड़ान भर रही है। भाजपा ने अपने सहयोगी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पंजाब के साथ नशों की चपेट में आए युवा वर्ग को तबाही से बचाने के लिए बगावती झंडा बुलंद करके सरकार के विरूद्ध पैदा हो रहे आम असंतोष के तूफान में से अपनी नैया को बाहर निकाल लेना चाहती है, मगर यह पर्दे की पीछे की सुगबुगाहट नजर आ रही है।

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