अकाली-भाजपा तालमेल पर ''ग्रहण" को लेकर भाजपा दुचिती में

सिरसा(प्रैसवार्ता)।  हरियाणा विधानसभा चुनाव में अकाली दल द्वारा भाजपा का विरोध करने से भाजपाई शीर्ष सकते में है, क्योंकि पंजाब में भाजपा का अकाली दल से तालमेल है। भाजपा हरियाणा और भाजपा का एक वर्ग अकाली दल को सबक पढ़ाने की वकालत कर रहा है, वहीं एक वर्ग दिल्ली विधानसभा चुनाव तक चुप्पी साधने का पक्षधर है, क्योंकि पंजाब में कोई दांव खेलना भाजपा दिल्ली पर भारी पड़ सकता है। दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों में से एक तिहाई पर सिखदाता निर्णायक भूमिका निभाते है। दिल्ली गुरूद्वारा प्रबंधक समिति पर भी अकाली दल(बादल) का कब्जा है और भाजपा दिल्ली में सरकार बनाने के लिए भाजपा से कोई पंगा लेना नहीं चाहती। भाजपा का एक वर्ग दिल्ली में सरकार बनाने के लिए अकाली दल का साथ छोडऩे का पक्षधर नहीं है, जबकि दूसरा पर्व निगम चुनाव अकेले लडऩे का राग अलाप रहा है। बिहार, हरियाणा और महाराष्ट्र में भाजपा अपने सहयोगी राजनीतिक दलों से राजनीतिक तलाक ले चुकी है, मगर अकाली दल में तलाक से जल्दबाजी करती भाजपा नजर नहीं आ रही। भाजपा पंजाब के नए प्रभारी प्रौ. राम शंकर का पंजाब के सभी जिला प्रकोष्ठों से कहना कि भाजपा को अकेले भी चुनावी समर में उतरना पड़ सकता है इसलिए चुनावी तैयारी में जुट जाए, संकेत देता है कि भाजपा हरियाणा विधानसभा चुनाव में अकाली दल के भाजपाई विरोध से तिलमिलाई हुई है। भाजपा पंजाब में अकाली दल की सहयोगी होते हुए घुटन महसूस कर रही है, जिससे भाजपाई शीर्ष नेतृत्च भी वाकिफ है। रमा शंकर कहते है कि देश कांग्रेस मुक्त और भाजपा युक्त चाहता है और देशवासियों का विश्वास भी भाजपा के प्रति बढ़ा है।  भाजपा को मजबूती देने के लिए राष्ट्रीय दल स्वयं सेवक संघ ने पंजाब में कमान संभाल ली है, जिससे अकाली दल सकते में आ गया है। अकाली दल और भाजपा के रिश्तों में आ रही दरार से यह क्यास लगाया जा रहा है कि अकाली दल व भाजपा तालमेल पर कभी भी ''ग्रहणÓÓ लग सकता है। दूसरी तरफ हरियाणा विधानसभा चुनाव से उत्साहित भाजपा ने पंजाब मिशन 2017 पर काम शुरू कर दिया है, ताकि राजनीतिक तलाक लेने वालों से पहले राजनीतिक जमीन तैयार की जा सके। भाजपा शीर्ष नेतृत्व की हर रणनीति से वाकिफ अकाली ने भी मंथन शुरू कर दिया है, क्योंकि निमंत्रण के बावजूद भाजपाई दिग्गजों ने दिल्ली स्थित रकाब गंज गुरूद्वारे में 1984 के दगों में मारे जाने वाले लोगों की याद में बनाए जाने वाले स्मारक से दूरी रखी थी, जो कई सवालिया निशान उठाते है। भाजपा और अकाली दल के बीच चल रही आंख मिचौली क्या रंग दिखाएगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, मगर ऐसे संकेत मिल रहे है कि गठबंधन की गांठ कभी भी खुल सकती है। 

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