आतंकवाद: एक सरकार एक देश पर इसकी जिम्मेवारी छोडने से कुछ नहीं होने वाला

आज देश मुंबई हमले की बरसी पर नम आंखों से देश उन वीर जवानों के साथ उन बेगुनाह लोगों को याद कर रह रहा जो वर्ष 2008 में मुम्बई में आंतकवादियों की गोली का शिकार बने। देश के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने भी आतंकी हमले की छठी बरसी पर आतंकवाद से लडऩे और 'समाज से इसे उखाड़ फेंकने' की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया को दोहराते हुए ट्वीट किया है कि हम 2008 में आज के दिन हुए भयावह आतंकी हमलों को याद करते हैं तथा जान गंवाने वाले निर्दोष स्त्री-पुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। आज कुछ गम्भीर बिन्दू है जिस पर चर्चा कर उससे लागू किया जाना बेहद जरूरी है। आंतकवाद से हमारे देश के साथ विश्व के अन्य देश भी पिडित है ,आंतकवाद की पृष्ठभुमि नस्लीय, जातीय, धार्मिक, आर्थिक उत्पीडन का बिगडा स्वरूप है जिससे स्वार्थी राजनीतिक ताकतें अपने तुच्छ स्वार्थ के लिए आंतकी रूप में पेश कर देती है। जिसे कभी भी स्वीकार नहीं जा सकता। बेरोजगारी,अनपढता व अन्य समाजिक बुराईयों की गन्दगी पर भी आंतकवाद कुकरमुत्तों की तरह उपज जाता है। आंतकवादी एक से दूसरे देश के कानूनों का लाभ लेते हुए सरंक्षण प्राप्त करते रहते है। समय-समय पर विश्व के पटल पर ऐसी कोशिशें भी जनवादी समुहों की रही है जिससे आंतकवाद के खिलाफ संाझा मोर्चा बना इसके खात्मा का भागीरथी प्रयास किया जा सके। पर ये तो तय है विभिन्न मंचों पर यही निष्कर्ष निकलता है कि आंतकवाद हमारी विकृत समाजिक संरचनाओं की मवाद में पैदा होने वाला राक्षस है। जिसका खात्मा अन्य बुराईयों के खत्म होने के साथ ही तय है। जिस दिशा में समस्त मानवता को एकजुट होकर प्रयास करने की जरूरत है। अकेली एक सरकार एक देश पर इसकी जिम्मेवारी छोडने से कुछ होने वाला नहीं है। (नवल सिंह, प्रैसवार्ता)

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