सिरसा में कांग्रेस के अस्तित्व को खतरा

सिरसा(प्रैसवार्ता)। लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव में मतदाताओं द्वारा कांग्रेस को दिखाए गए आईने से कांग्रेस के अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडराने लगे है। सिरसा में कांग्रेस प्रत्याशी को पराजित करने में अहम् भूमिका निभाने वाले कांग्रेस नेता आज भी स्वयं को कांग्रेसी ठेकेदार मानकर चल रहे है। शहर में जल्द ही होने वाले परिषद के चुनाव को लेकर भी कांग्रेस की ''काली भेडें" लोकसभाई तथा विधानसभाई चुनाव की तर्ज पर अपनी भूमिका निभा सकते हैं, ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है। शहर में स्वयंंभू कांग्रेसी दिग्गजों की एक लंबी कतार है, मगर बुद्धिजीवी तथा सरकारी तंत्र विधानसभा क्षेत्र सिरसा से कांग्रेस टिकट पर चुनाव लडऩे वाले नवीन केडिया को ही प्राथमिकता देते है। कांग्रेसी बनाम ब्लैकशीप कांग्रेस में चल रही आंख मिचौली से ऐसे आसार बनते नजर आ रहे है कि सिरसा में कांग्रेस को अपना अस्तित्व बचाना मुश्किल हो सकता है। कांग्रेस के अस्तित्व को बरकरार  रखने के लिए नवीन केडिया ही अनथक प्रयास कर रहे हैं, मगर उनके प्रयासों में ''काली भेडें" बाधक बनी हुई है। क्षेत्र सिरसा में मजबूत जनाधार वाली कांग्रेस को राजनीतिक कब्र खोदने वाले कांग्रेसी ही है, जिन्हें राजनीतिक भाषा में ''काली भेडें" कहा जाता है। चाचा नेहरू की जयंति पर कार्यक्रम हो या फिर स्व. इंदिरा की जयंति पर कांग्रेस में नवीन केडिया ही नजर आते है, जबकि मीडिया में अलग-अलग डफली बजाने वाले कांग्रेसीजन छपते देखें जा सकते है।

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