आसराम, रामदेव, गुरमीत राम रहीम, शंकराचार्य, चन्द्रास्वामी के बाद बाबा रामपाल

बाबा रामपाल
सिरसा(प्रैसवार्ता)। सतलोक आश्रम मुखिया रामपाल पहले ऐसे धार्मिक गुरू नहीं है, जिनका सरकार से टकराव हुआ है। इससे पहले 1996 में चन्द्रास्वामी, 2011 में बाबा रामदेव, 2012 में गुरमीत राम रहीम सिंह, 2013 में बापू आसाराम तथा 2014 में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती सरकार से टकराव कर चुके है। ''प्रैसवार्ता" को मिली जानकारी के अनुसार 1996 में चन्द्रा स्वामी उर्फ नेम चन्द, जो कई राजसी दिग्गजों के आध्यात्मिक गुरू माने जाते थे और राजनीति में प्रभावी प्रभाव रखते थे, मगर एक धोखाधड़ी की चपेट में आने पर राजनीति प्रभुत्व की बदौलत सरकार व कानून के बीच आंख मिचौली करते रहे। आखिर उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप ने उन्हें जेल भिजवा दिया था। दिल्ली में योग शिविर लगाकर बैठे बाबा रामदेव को 2011 में पुलिस ने अवैध और ला-आर्डर के लिए खतरा बताकर आधी रात को शिकंजा कसने की तैयारी की, तो रामदेव महिलाओं के वस्त्र पहनकर भाग निकले थे। वर्ष 2012 में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह और सिख समुदाय के बीच भी पंजाब-हरियाणा में कई जगहों पर हिसंक टकराव हुए। पंजाब-हरियाणा की सरकारों को इनके समर्थकों को काबू करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी है। वर्तमान में भी इनके बीच अक्सर तनाव की खबरें ला एंड आर्डर में समस्याएं पैदा कर देती है। दो लड़कियों से रेप के आरोप में आसाराम को वर्ष 2013 में पुलिस ने गिरफ्तार करने का प्रयास किया, तो कई दिनों तक आसाराम और पुलिस के  बीच आंख मिचौली चलती रही। कई जगह आसाराम के समर्थकों ने पुलिस पर हमले भी किए, मगर पुलिस ने जुलाई 2013 में आसाराम को काबू कर लिया, जो अभी तक जेल में ही है, जबकि वर्ष 2014 में द्वारिका के शंकराचार्य स्वामी रूपानंद सरस्वती ने शिरड़ी के साई बाबा को भगवान या हिंदू गुरू मानने से इंकार कर दिया था, जिसके चलते दोनों के समर्थक भिड गए और कई स्थानों पर हिंसक झड़पे भी हुई, जिस पर काबू पाने के लिए पुलिस प्रशासन को काफी मशक्त करनी पड़ी।

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