क्रिकेट बुकिज की गिरफ्त में हमारा शहर

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हमारा शहर इन दिनों क्रिकेट बुकिज की गिरफ्त में फंसता जा रहा है। पुलिस बुकिज पर कार्रवाई करने में देरी कर रही है। सरकारी आंकड़े देंखे, तो पिछले एक साल से शहर में क्रिकेट बुकिज नहीं चल रही, यानि कोई भी केस दर्ज नहीं है। क्या ऐसा हो सकता है कि शहर में क्रिकेट बुकीज पर सट्ट न लगाए जा रहे हो? शहर के हर दसवें युवा को पूछों तो जवाब मिलता है कि बुकिज पर सट्टे लगते है। आखिर कौन है, जो शहर के इस दलदल में धकेल रहा है। ऐसा नहीं है कि शहर में क्रिकेट बुकिज नहीं चल रही। चलती तो है मगर कहीं ना कही उनकी सेटिंग रहती है। वो सेटिंग चाहे बड़े पुलिस अफसरों से हो या फिर थाने के कर्मचारियों से। जब बुकिंग पर शिकंजा कसने की बात आती है तो उनके पास पहले ही खबर पहुंच जाती है। नतीजा ये रहता है कि बुकिज वाले पुलिस की आंखों में धूल झोंक में कामयाब हो जाते है। जब भी पुलिस का कोई बड़ा साहब आता है, तो इन पर शिकंजा कसा जाता है। यहां हमारे शहर में शिकंजा कसने का नाम ही सेटिंग करना है।

जब मीणा ने कसा था शिकंजा
बात एक साल पहले की है। शहर में पुलिस के एक बड़े अधिकारी आए थे आईपीएस मीणा। वे यहां एएसपी लगे। उन्होंने अपने कार्यभार संभालने के चौथे, पांचवे दिन ही क्रिकेट बुकिज पर काम किया। कुछ मुखबिर लगाए। आखिरकार दो दिन बाद मीणा साहब कामयाब हुए। उन्होंने सिटी एसएचओ को बिना बताएं एक जगह रेड कर डाली। शहर के पांच युवक क्रिकेट बुकिज चलाते पकड़े गए। जहां क्रिकेट बुकिज चल रही थी, उसके बाहर किसी कन्पैक्शनरी का बोर्ड लगाया हुआ था। मीणा साहब ने मीडिया के कुछ लोगों को बताया कि वे क्रिकेट बुकिज को लेकर सख्त है। जुआ सट्टा अधिनियम के साथ पुलिस नेे आईटी एक्ट भी लगाया। पुलिस का कहना था कि पांचों युवकों के मोबाइल में पोर्न वीडियों मिले है। उस समय पुलिस के हाथ कुछ ऐसी डायरियां भी लगी थी, जिसमें पूरे सट्टे के कारोबार का हिसाब-किताब था। वो लोग सट्टे के अलावा सोने के आभूषणों पर अधिक ब्याज लेकर पैसा देते थे। इसके बाद वो पैसा सट्टे में लगाया जाता था। पुलिस का कहना था कि ये ऐसा गिरोह है कि जिसमें शहर के बहुत से लोग शामिल है। उस समय होना ये चाहिए था कि पुलिस सभी को बेनकाब करती जबकि हुआ यह कि मामला ही दब गया। सवाल उठता है कि आखिर कहां गई वो डायरियां। वो हिसाब किताब। तीन दिन बाद एक लोकल न्यूजपेपर में बड़े से अक्षरों में खबर छपी कि '...लगता है सेटिंग हो गई' आखिर ये कौन सी सेटिंग थी, जिसका पता अभी तक नहीं चला है। जैसे-जैसे समय बीतता गया। मीणा साहब विवादों में आ गए। सूत्रों के मुताबिक साहब नई इनोवा गाडी भी लेकर आए थे, जो एक न्यूजपेपर की सुर्खियां बनी थी।

महीने में कर रहे है करोड़ों का कारोबार
सूत्रों की मानें, तो सिरसा में पूरे प्रदेश के कई बड़े बुकिज है, जो हर महीने करोड़ों का कारोबार करते है। कहने को तो ये सफेद पोश है, मगर इनका धंधा काला है।  बड़ी लग्जरी गाडिय़ों से लेकर फार्म हाऊस तक इनके पास है, जोकि सट्टे के कारोबार की काली कमाई है। शहर में बड़े बुकिज लिमिटेड से है, मगर छोटे बुकिज अनगिनत बताए जाते है। ऐसे लोगों को नेताओं का भी सहारा है, इसलिए पुलिस इनको बेनकाब करने से कतराती भी है। वैसे बुकिज बोलने के लिए या फिर यूं कहे कि इस धंधे से जुडऩे के लिए पहले सिक्योरिटी अमाऊंट की बात की जाती है। सिक्योरिटी अमाऊंट न हों, तो उस शर्त पर फिर शहर के कुछ लोगों का फोन करवाया जाता है, जो उनके पैसे की गारंटी लेते है। इस काले कारोबार की गिरफ्त में अब सीनिय सेकंडरी स्कूल के बच्चों से लेकर यूनिवर्सिटी में पढऩे वाले युवा भी आ चुके है। शहर में क्रिकेट के अलावा चुनावों पर भी करोड़ों का दांव खेला जाता है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भी करोडों रूपये का दांव खेला गया था। कुछ लोगों के पैसे फंस गए, तो कुछेक ने लाखों रूपये कमाए भी। अब लोगों की जुबां पर एक ही नाम आता है वो है सट्टा। सट्टा अब सिरसा के लिए सिरदर्द बन गया है। यह इसको बर्बाद कर रहा है। अब शहर में दिल्ली व जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनावों को लेकर सट्टा खेला जा रहा है। पुलिस को ऐसे लोगों पर शिकंजा कसना होगा। ऐेसे अपराध को रोकने के लिए शहर के एक व्यक्ति को आगे आना होगा। लालच व लोभ को छोड़कर भविष्य की तरफ ध्यान देना होगा। वहीं प्रशासन को सख्त कदम उठाने होंगे।

वो बताता है शहर के सारे राज...
शहर का रहने वाला एक रईशजादा जो आईपीएस व आईएएस अधिकारियों को अपना दोस्त बताता है। वो यहां शहर में आने वाले बड़े अधिकारियों को शहर के बारे में फीडबैक देता है। इसके साथ सट्टा कारोबार से जुड़े लोगों के बारे में भी वो सब राज बता देता है, जिससे शहर के लोग आज भी अनजान है। कुछ सालों पूर्व एक मैडम अधिकारी यहांं आई थी। उनसे शहर के लोगों को बहुत सारी उम्मीदे थी। उन माताओं ने उनसे वो सपने संजोए थे कि उनका बेटा अपराध से अब सहीं रास्ते पर आ जाएगा, मगर ऐसा नहीं हुआ।

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