हरियाणा में नए वर्ष को दिखेंगी सभी राजनीतिक पार्टियां संगठन मजबूती के लिए

सिरसा(प्रैसवार्ता)। लोकसभा चुनाव तथा विधानसभा चुनाव में मतदाताओं द्वारा दिखाए गए ''आईने" को लेकर हरियाणा के सभी राजनीतिक दल अपनी अपनी पार्टी को संगठित करने के लिए नए वर्ष से नई रणनीति के साथ नजर आएंगे। कांग्रेस पार्टी में रद्दोबदल, इनैलो तथा हजकां द्वारा संगठन भंग तथा भाजपा द्वारा नए सिरे से संगठन को मजबूती देने की कवायद शुरू हो चुकी है और क्यास लगाए जा रहे है कि नए वर्ष में राज्य में प्रमुख राजनीतिक पार्टियों की तस्वीर बदली-बदली नजर आएगी। कांग्रेस, इनैलो, भाजपा व हजकां सभी अपने संगठन को मजबूती देने के लिए योजनाएं बना रही है, जिन्हेंं नव वर्ष में न सिर्फ अमलीजामा पहनाया जाएगा, बल्कि हरियाणवी राजनीतिक इतिहास में नए चेहरे दिखाई देंगे। सत्तारूढ़ भाजपा के नए प्रदेशाध्यक्ष अपनी नई कार्यकारिणी का गठन करेंगे। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर की ताजपोशी से लेकर अब तक कार्यकारिणी का गठन नहीं हुआ है।  इनैलो तथा हजकां ने भी अपनी कार्यकारिणी भंग करके जल्द नई कार्यकारिणी का संकेत दिया है। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर का कहना है कि पार्टी की सदस्यता अभियान समाप्त होने के साथ-साथ नए वर्ष में जिला व खंड स्तरीय इकाईयों का गठन किया जाएगा, जबकि नई कार्यकारिणी में पुराने दिग्गजों के साथ साथ नए चेहरों को शामिल किया जाएगा। भाजपा अपने बलबूते पर सत्ता तक पहुंच कर अपना जनाधार बढ़ाने की सोच रखती है, मगर नए भाजपाईयों को लेकर जरूर बेचैन नजर आती है, क्योंकि उनकी दी गई तव्वजों पर पुराने व निष्ठावान भाजपाईयों को खफा कर सकती है। इसलिए भाजपा फूंक-फूंक कर कदम रखी रही है। प्रमुख विपक्षी दल इनैलो के प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा की दलील है कि जल्द ही पार्टी के वर्तमान संगठन को भंग करके नए सिरे से गठित किया जाएगा, जिसमें लोकसभा व विधानसभा चुनाव में परिश्रमी व समर्पित कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेवारी दी जाएगी। कांग्रेस, भाजपा व इनैलो असक्रिय कार्यकर्ताओं और नेताओं से पीछो छुड़ाने की फिराक में है, वहीं हजकां ने भी अपनी कार्यकारिणी, जिला स्तरीय व खंड स्तरीय इकाईयों के गठन के लिए पदाधिकारियों की कमी है।  लोकसभा चुनाव में हजकां ने दो संसदीय क्षेत्रों से चुनाव लड़ा, मगर खाता नहीं खुल पाया, जबकि विधानसभा चुनाव में हजकां सुप्रीमों कुलदीप बिश्रोई और उनकी धर्मपत्नी रेणुका बिश्रोई ही जीत सके। इस प्रकार हजकां पति-पत्नी तक ही सीमित रह गई है।  

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