विकास के साथ बढ़े अपराध और भ्रष्टाचार में हरियाणा बना नंबर वन - The Pressvarta Trust

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Monday, November 3, 2014

विकास के साथ बढ़े अपराध और भ्रष्टाचार में हरियाणा बना नंबर वन

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा प्रदेश बेरोजगारी, स्वैरोजगार, बेटियों के सम्मान में भले ही पिछड़ गया हो, मगर विकास के साथ-साथ बढ़ा अपराध का आंकड़ा तथा गहरी जड़े जमा चुके भ्रष्टाचार में पहले नंबर पर कहा जा सकता है। शिक्षा का प्रतिशत बढऩे के साथ ही बढ़ रहा बेरोजगार आंकड़ा सरकारी नौकरी का मोह नहीं छोड़ पाया, क्योंकि सरकार के स्वैरोजगार के लिए योजनाएं तो बनाई, मगर उन्हें ढंग से अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। प्रदेश में विश्वविद्यालय, सरकारी कॉलेजों, आई आई एम, चिकित्सा विश्वविद्यालय, लॉ कॉलेज, तकनीकी संस्थाओं की कमी नहीं है, मगर सरकारी तंत्र बेरोजगार युवाओं के प्रति गंभीर नहीं रहा, जिस कारण आंकड़ा बढ़ता चला गया। कांग्रेसी शासन में पिछले एक दशक में प्रदेश को 117 उद्योग मिले है, जिनमें तीन लाख से ज्यादा लोग काम कर रहे है। इनमें से 80 प्रतिशत अन्य राज्यों से है। हरियाणा में कल्पना चावला, कविता चहल, गीता फौगाट, बबीता फौगाट, सीमा आंतिल, कृष्णा पूनिया जैसी होनहार बेटियों की लंबी कतार है, मगर उन्हें पुरूष समान दर्जा नहीं मिल पाया। घर से लेकर समाज, परिवार, दफ्तरों में बेटियां भेदभाव की चपेट में है। कन्या भ्र्रूण हत्या हरियाणा अन्य राज्यों से कहीं आगे है। हरियाणा गठन के बाद प्रदेश में विकास तो बढ़ा है, मगर अपराधों का आंकड़ा काफी तेजी पकड़ चुका है। मेहनतकश किसानों और सैनिकों की पहचान बनाने वाले हरियाणा की तस्वीर बदल रही है। अपराध बढ़ रहेे है, युवा वर्ग नशे की दलदल में घंसता जा रहा है, जिसके पीछे बेरोजगारी ही मुख्य कारण कहा जा सकता है। पिछले कई सालों में बढ़ रही बलात्कार की घटनाएं प्रदेश को शर्मसार किए हुए है। विकास में नए आयाम स्थापित करने वाले साईबर सिटी गुडग़ांव व फरीदाबाद में अपराधों में बढ़ौतरी हुई है। हत्याओं के मामले में गुडग़ांव नंबर वन पर है, जहां पिछलेे पांच वर्ष में 603 हत्याएं हुई है, जबकि सोनीपत में 402, हिसार में 316, रोहतक में 276 तथा फरीदाबाद में 203। राज्य में कई ऐसे जिले भी है, जहां विकास तेजी से हुआ है, मगर दुष्कर्म के मामले ज्यादा हुए है। रोहतक और करनाल जिले  पहले तथा दूसरे नंबर हैै। भ्रष्टाचार हरियाणा में इस कद्र जड़े जमा चुका है कि किसी भी सरकारी दफ्तर में बगैर रिश्वत दिए कोई काम नहीं होता। प्रदेश में कई भ्रष्ट वरिष्ठ अधिकारी कानूनी शिकंजे में भी आ चुके है, मगर रिश्वती लेन-देन ज्यों का त्यों धडल्ले से चल रहा है।

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