डीईटीसी टैक्स करवाता है चोरी!

सिरसा(प्रैसवार्ता)। फर्जी फर्मों के गठन में आबकारी एवं कराधान विभाग के सिरसा के भ्रष्ट अधिकारियों की पोल-पट्टी खुलकर सामने आ गई है। यह साबित हो गया है कि कराधान विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों ने अपनी जेबें भरने के लिए नियम कायदों को ताक पर धर दिया। फर्म के रजिस्ट्रेशन के लिए सरकार द्वारा नियम कायदे बनाए गए हैं मगर कराधान विभाग के चोर अधिकारियों ने उन नियमों की पालना नहीं की। यदि नियमों की पालना की जाती तो नोहरिया बाजार के मकान नं. 20५ में दर्जन भर फर्मों का रजिस्ट्रेशन किसी भी सूरत में नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में जब नोहरिया बाजार में मकान नं. 205 तलाशना ही मुश्किल है तब कराधान विभाग के अधिकारियों ने क्या जांच पड़ताल की। अधिकारियों ने कैसे रामकिशन शर्मा नामक व्यक्ति की दर्जन भर फर्मों का रजिस्ट्रेशन कर दिया। रजिस्ट्रेशन के लिए रिहायशी मकान में व्यवसायिक गतिविधियों के लिए फर्म नहीं खुल सकती। एक भवन में दो से अधिक फर्म खुलने का कोई प्रावधान नहीं है। फर्म की रजिस्टे्रशन से पूर्व कराधान विभाग के इंस्पैक्टर द्वारा मौका मुआयना किया जाता है। तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद कराधान विभाग के ईटीओ द्वारा जांच की जाती है। ईटीओ की रिपोर्ट के बाद डीईटीसी द्वारा उसका अनुमोदन किया जाता है। जब जाकर किसी फर्म का पंजीकरण हो पाता है। फर्म की पंजीकरण के लिए प्रोपराइटर का भवन के सामने ठीक उसी प्रकार फोटो भी लिया जाता है जिस प्रकार बिजली का कनेक्शन लेने के लिए उपभोक्ता का। इस प्रकार नोहरिया बाजार के मकान नं. २०५ पर दर्जन भर फर्में बनाने के लिए एक भवन के आगे किस प्रकार अलग-अलग फोटो ली गई? यानि कराधान विभाग के इंस्पेक्टर, ईटीओ व डीईटीसी ने फर्जी फर्म को पंजीकृत करने की एवज में अपनी तिजोरी भरी। भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा अपनी तिजोरी भरने के लिए फर्जी फर्म संचालकों को टैक्स की लूट के लिए खुली छूट प्रदान कर दी गई। 
रजिस्ट्रेशन के लिए क्या हैं जरुरी दस्तावेज?
(1) राशनकार्ड
(2) पैन कार्ड
(3) भवन की रजिस्ट्री या किरायानामा
(4) फोटो भवन के सामने 
(5) दो जमानती फर्म संचालक

205 में संचालित करोड़ों का काला कारोबार
आयकर विभाग दिल्ली के सहायक आयुक्त संयम सुरेश जोशी द्वारा पंजाब नेशनल बैंक सिरसा को भेजे गए नोटिस में जो महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है?उसके अनुसार  नोहरिया बाजार में एक घर से 7-7 फर्में संचालित की जा रही हैं। इन फर्मों द्वारा करोड़ों रुपए का लेनदेन भी किया जा रहा है जबकि हकीकत में नोहरिया बाजार में दर्शाया गया मकान ही नहीं हैं। नोटिस में नोहरिया बाजार के मकान नं. 205 में रोहित ट्रेडिंग कंपनी (पैन नं. बीओबीपीएस1988एच), जय दुर्गा ट्रेडिंग कंपनी (पैन नं. बीओबीपीएस1988एच), महालक्ष्मी सेल्स, नंद किशोर राम किशोर, रामकिशन शर्मा (पैन नं. बीओबीपीएस1988एच), नंद किशोर राम किशन, श्री श्याम इंटरप्राइजेज (पैन नं. बीओबीपीएस1988एच) का संचालन दिखाया गया है। जबकि नोहरिया बाजार में 205 नं. का मकान ही नहीं है। बाजार की गली कांडा वाली, डकैतों वाली, मस्जिद वाली गली में जांच करने पर भी मकान नं. 205 का अता पता नहीं चला। यानि करोड़ों रुपए का व्यापार जिस मकान से किया जा रहा है उसके बारे में गली वाले तक नहीं जानते। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि फर्जी फर्म संचालकों ने किस तरह से फर्जी पते पर अपना कारोबार सजाया है। इससे भी बड़ी बात यह है कि पंजाब नेशनल बैंक ने ही एक ही पते दर्जन भर फर्मों के करंट अकाउंट (चालू खाता) खोल दिए जबकि सामान्यत: चालू खाता खोलने के लिए व्यवसायी से अनेक औपचारिकताएं पूरी करवाई जाती हैं और गारंटी भी मांगी जाती है। मगर नोहरिया बाजार के मकान नं. 205 से संचालित होने वाली दर्जन भर फर्मों के मामले में पंजाब नेशनल बैंक ने बड़ी आसानी से इन फर्मों के खाते खोल डाले। आयकर विभाग द्वारा जांच के घेरे में लेने के बाद ऐसी उम्मीद जगी है कि फर्जी फर्मों का भंडाफोड़ होगा और पंजाब नेशनल बैंक के भ्रष्ट अधिकारियों के चेहरे भी बेनकाब हो पाएंगे।

वार्ड भी गलत दर्शाया
कराधान विभाग व पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारियों ने किस प्रकार तथ्यों पर आंखें मूंदे रखी। इसका जीता-जागता उदाहरण यह है कि नोहरिया बाजार का वार्ड नं. 7 दर्शाया गया है जबकि नोहरिया बाजार वार्ड नं. 19 का हिस्सा है। यह कभी भी वार्ड नं. 7 नहीं रहा। दर्जन भर फर्मों की रजिस्ट्रेशन में नोहरिया बाजार को वार्ड नं. 7 दर्शाया गया है। इस वार्ड में मकान नं. 205 को तमाम फर्मों का ठिकाना। बड़ा सवाल यह है कि नोहरिया बाजार जब वार्ड नं. 7 में ही नहीं है तब बैंक व कराधान विभाग ने किस पते पर और क्या जांच कर फर्म का रजिस्ट्रेशन किया और खाता खोला?

अलग-अलग क्यों नहीं किरायानामा
फर्जी फर्मों के संचालन के लिए अधिकारियों की सांठ-गांठ के बगैर यह संभव नजर नहीं आता। एक ही मकान में दर्जन-दर्जन भर फर्में बनना भ्रष्ट अधिकारियों के सहयोग से ही संभव है। मंडी की दुकानों में दो से अधिक फर्मों का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाता। मार्केटिंग बोर्ड द्वारा ही किराएनामे को लेकर अड़चन डाली जाती है। ऐसे में कराधान विभाग द्वारा एक ही घर में दर्जन भर फर्मों के लिए किस प्रकार रजिस्ट्रेशन किया गया। यह अधिकारियों की संलिप्पतता जारी करता है। नियमानुसार स्वयं की प्रोपर्टी न होने पर भवन का किरायानामा भी दर्शाया जाना होता है। मकान नं. 205 के मामले में आखिर कितने किरायेनामे बनाए गए। यह जांच का विषय है। आखिर कराधान विभाग के अधिकारियों ने एक ही मकान के दर्जन-दर्जन भर किराएनामे देखने पर भी आंखें मूंद ली। मामला चूंकि आयकर के हत्थे चढ़ चुका है ऐसे में कराधान विभाग के चोर अधिकारियों व कर्मचारियों का धर दबोचा जाना भी तय है। 

कौन है ये रामकिशन शर्मा?
फर्जी फर्मों के संचालन की कड़ीवार पड़ताल में रामकिशन शर्मा नाम बार-बार सामने आया है। रामकिशन शर्मा के पैन नंबर का उल्लेख आयकर विभाग द्वारा पंजाब नेशनल बैंक को भेजे गए नोटिस में भी किया गया है। दर्जन भर फर्मों का संचालन रामकिशन शर्मा द्वारा दर्शाया गया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि कौन है ये रामकिशन शर्मा? कैसे उसने नोहरिया बाजार के मकान नं. 205 में दर्जन भर फर्में बना डाली? कैसे एक रिहायशी मकान से वह करोड़ों रुपए का कारोबार संचालित करने लगा? कौन है इस रामकिशन के पीछे? कैसे पीएनबी ने एक ही व्यक्ति, एक ही मकान पर दर्जन भर फर्मों के खाते खोल डाले? कैसे आबकारी एवं कराधान विभाग ने फर्म खोलने में मदद की? कौन है कराधान विभाग के चोर अधिकारी जिन्होंने नियमों की भी पालना नहीं की? बड़ा सवाल यह भी है कि मकान नं. 205 का रामकिशन से क्या है सरोकार?
एक सांध्य दैनिक समाचार पत्र द्वारा की गई तहकीकात में यह तथ्य सामने आया है कि इन फर्मों का संचालन रामकिशन शर्मा नामक व्यक्ति द्वारा किया गया है क्योंकि इन फर्मों के संचालन के लिए जिस पैन नंबर का इस्तेमाल किया गया है, वह रामकिशन शर्मा के नाम से बना है। पैन नं. बीओबीपीएस1988एच रामकिशन शर्मा के नाम से बना है और इस पैन नंबर के आधार पर दर्जन भर फर्मों का संचालन दर्शाया गया है। नोहरिया बाजार के मकान नं. 205 पर दर्जन भर फर्में दर्शाई गई है जबकि जांच पड़ताल में मकान नं. २०५ कहीं नहीं मिला। गलियों में रहने वाले लोग भी अचंभित हैं कि उनके बाजार में दर्जन भर फर्में एक ही घर से संचालित की जा रही हैं और उन्हें पता तक नहीं है। नोहरिया बाजार की विभिन्न गलियों में व्यवसायिक गतिविधि के नाम पर छोटी दुकानें अवश्य हैं मगर बड़ी व्यवसायिक यूनिट कोईनहीं है। ऐसे में करोड़ों रुपए का लेनदेन करने वाली फर्मों का संचालन मकान नं. २०५ से किए जाने पर लोग भी हैरान-परेशान हैं। 

डीसी साहब लें संज्ञान
मामला चूंकि सिरसा से है और सिरसा को ही टैक्स के रुप में करोड़ों रुपए की चपत लग रही है ऐसे में उपायुक्त को मामले की उच्च स्तरीय जांच करवानी चाहिए। उपायुक्त के हस्तक्षेप के बाद ही आबकारी एवं कराधान विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों के साथ-साथ पंजाब नेशनल बैंक के गैर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई संभव हो पाएगी। आयकर विभाग का नोटिस भी जांच का आधार बन सकता है।

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