सिरसा में बहता है कच्ची शराब का दरिया

सिरसा(वंश जैन/प्रैसवार्ता)। नंबर वन हरियाणा प्रदेश के सिरसा जिला में एक लंबे अरसे से कच्ची शराब का दरिया बह रहा है, मगर शासन-प्रशासन इस मामले में ठोस कदम उठाने के बावजूद परिणाम कुछ खास सामने नहीं आ रहे है। सूत्रों के अनुसार सिरसा जिला में कई पॉश इलाकों में कच्ची दारू बेचने के कई अड्डे चल रहे हैं, जिन पर प्रतिदिन हजारों रुपयों का कारोबार होता है। इस धंधे का संचालन पहले पुरुष ही करते थे, लेकिन अब इसमें महिलाएं भी उतर आई हैं और वे पुरुषों को पछाड़ रही हैं। कच्ची दारू के कुटीर उद्योग के रूप में पनपने के कई कारण हैं। पहला कारण है कम लागत में भारी मुनाफे का होना। दूसरा, इस धंधे में प्रयुक्त की जाने वाली कच्ची सामग्री क्षेत्र में आसानी से उपलब्ध है। एक शराब व्यवसायी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि शराब को बनाने के लिए जिस गुड़ या शीरे की जरूरत होती है, वह आसानी से मिल जाती है। कच्ची दारू सरकारी ठेकों पर बिकने वाली देसी शराब के मुकाबले काफी सस्ती होती है। इसकी उपलब्धता भी हर गांव में है। उसने यह भी बताया कि त्योहारों और चुनावों के समय कच्ची दारू की मांग बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। यह गैरकानूनी धंधा आज हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का जरिया बन गया है। कच्ची दारू निमार्ताओं व विक्रेताओं पर पुलिस तभी शिकंजा कसती है, जब ऊपर से अधिकारी ज्यादा सख्ती करते हैं। पुलिस कुछ भट्टियां व शराब पकड़ कर चंद लोगों को जेल भेज देती है जो जमानत कराकर फिर वही धंधा शुरू कर देते हैं। 

1 comment:

  1. CWP-8008-2013 (O&M)

    .. Kartar Singh vs. The State of Haryana and others

    Present: Mr.Satbir Gill, Advocate for the petitioner
    Mr.Ajay Gupta, Addl. Advocate General, Haryana
    Learned Additional Advocate General requests for some time to re-examine Annexure P-5 in view of the decision rendered as per Annexure P-1.
    Learned counsel for the petitioner has no objection to the same, but submits that there is a second aspect of the matter arising from the Excise Policy for the years 2013-14 and 2014-15. In terms of Clauses 1.2.3 and 1.2.4, the establishment of a vend in the proximity of schools, colleges, bus-stands and places of worship has been restricted.
    However, simultaneously, it has been observed that those vends which are already running and are re-established at the same locations year after year shall not be subjected to any such restriction. It is the latter aspect which is sought to be assailed.
    There appears to be merit in the contention of the learned counsel for the petitioner that merely because the vend exists, it should not be permitted in perpetuity. We can understand the stand of the learned Additional Advocate General to the extent that if there is an established vend, there may be some hiatus period between the policy coming into force and the vend being shifted. But, it cannot be a vend in perpetuity. Thus, whether a new school has been opened in proximity or a vend has been existing in the proximity of a school (or for that matter any other specified institution, as aforesaid) would make no difference.
    Thus, this aspect also ought to be examined by the respondents so that in such eventualities shifting of the vend can take place after the period of existing licence is over.
    Respondents to file an affidavit within four weeks.
    List on 16.12.2013.
    ( SANJAY KISHAN KAUL )
    CHIEF JUSTICE
    11.11.2013
    (AUGUSTINE GEORGE MASIH)
    JUDGE
    parkash*

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