हरियाणा, जहां विपक्षी दलों का लडखड़ाया हुआ है संगठन

सिरसा(प्रैसवार्ता)। लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव में हरियाणा के मतदाताओं द्वारा दिखाए गए आईने से सत्तारूढ़ भाजपा को छोड़कर सभी विपक्षी दलों का संगठनात्मक ढांचा लडखड़ाया हुआ है और प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों पर विराम लग गया है। कांग्रेस के लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी प्रधान की कमान अशोक तंवर ने संभाली थी, मगर अभी तक वह प्रांतीय तथा जिला स्तर पर नियुक्तियां नहीं कर पाए और कांग्रेस बगैर संगठन के होकर रह गई है, जिससे कांग्रेसियों का जोश निरंतर कम हो रहा है, जिसका खामियाजा लोकसभा चुनाव के बाद स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस को भुगतना पड़ सकता है। विधानसभा चुनाव में एक दशक तक सरकार में रही कांग्रेस न सिर्फ तीसरे नंबर पर रही, बल्कि प्रतिपक्ष पद भी हासिल नहीं कर पाई। राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यदि कांग्रेस ने अपना संगठनात्मक ढांचा तैयार न किया, तो उसके जनाधार पर ''ग्रहण" लग सकता है। हरियाणा के प्रमुख विपक्षी दल इनैलो के लोकसभा चुनाव में दो सांसद चुने जाने पर हौसले इतने बुलंद हो गए थे कि विधानसभा चुनाव में उन्हें सरकार नजर आने लगी थी, मगर हरियाणवी मतदाताओं ने ऐसी राजनीतिक पटकनी दी कि सरकार बनाना तो दूर की बात रही, एक तिहाई विधायक भी खो बैठे। इनैलो ने अकाली दल की मदद से तथा कानून व नियमों को तोड़कर इनैलो सुप्रीमों ओम प्रकाश चौटाला को चुनावी प्रचार में उतारा, ताकि वह सत्ता तक पहुंच सके, मगर इसका विपरित असर पड़ा। इनैलो नेता अभय चौटाला प्रतिपक्ष नेता तो बन गए, मगर पार्टी प्रधान अशोक अरोड़ा लुढ़क गए। अपनी पराजय के बाद अरोड़ा ने प्रांतीय, जिला व खंड स्तरीय ईकाईयों को भंग कर दिया, जिसके चलते पार्टी की गतिविधियों पर विराम लग गया है। हजकां सुप्रीमों कुलदीप बिश्रोई ख्वाब तो मुख्यमंत्री का देखते रहे, मगर विधानसभा चुनाव में स्वयं और अपनी पत्नी को छोड़कर किसी भी क्षेत्र में विजयी परचम नहीं लहरा पाए, जबकि इससे पूर्व हजकां का खाता नहीं खुला था। हजकां को मिली करारी हार उपरांत हजकां ने भी सभी प्रांतीय, जिला व खंड स्तरीय ईकाईयों को भंग करने की घोषणा तो कर दी है, मगर अभी तक वह संगठनात्मक ढांचा नहीं बना पाई। इसी प्रकार समस्त भारतीय पार्टी, हरियाणा लोकहित पार्टी, हरियाणा जन चेतना पार्टी चुनावी समर में दिखाई दी, मगर चुनाव परिणामों ने इन्हें हाशिए पर धकेल दिया है, जबकि बसपा जरूर खाता खोलने में सफल रही है। सभापा, हलोपा, हजचेपा, बसपा इत्यादि का संगठनात्मक ढांचा भी कांग्रेस व इनैलो की तरह लडखडाया हुआ दिखाई दे रहा है।

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