फर्जी एम्बुलैंस की चपेट में सिरसा

सिरसा(प्रैसवार्ता)। पंजाब तथा राजस्थान की सीमा से सटे हरियाणा के जिला मुख्यालय सिरसा में फर्जी एम्बुलैंसों का आंकड़ा निरंतर तेजी पकड़ रहा है, जो मरीजों का आर्थिक शोषण कर रहे है। शहर के कई अस्पतालों ने पांच-छह हजार रूपये में चालक रखकर अपनी एम्बुलैंस को टैक्सी बनाकर काली कमाई का कारोबार शुरू कर दिया है। एम्बुलैंस का इन दिनों मरीजों को रैफर करने का चलन नहीं रह गया है, बल्कि मरीजों को सीटी स्कैन, एक्सरे व लैब में जांच के लिए भी प्रयोग के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा है। शहर में ही अस्पताल से लैब तक आने जाने में मरीज से एंबुलैंस चार्ज के रूप मेंं मनमाने पैसे वसूले जाते है। कमाई का साधन बन चुकी एम्बुलैंस को प्राईवेट अस्पतालों के साथ साथ अनेक चालकों ने अपने वाहन बतौर एम्बुलैंस उतार दिए है। इतना ही नहीं, कई एम्बुलैंस चालकों की हिसार जैसे बड़े शहरों के निजी अस्पतालों से सांठगांठ है, जो मरीज को रोहतक या दिल्ली ले जाने की बजाए गंभीर स्थिति बताकर हिसार में रोक लेते है। प्रैसवार्ता को मिली जानकारी के अनुसार एम्बुलैंस के लिए अनुमति हासिल करनी होती है और इसकी बाडी का निर्माण विशेष हिदायतों के मुताबिक किया जाता है। इसके अतिरिक्त सायरन व नीली बत्ती लगाने के लिए अनुमति लेनी होती है। नियमों की अवहेलना करके एंबुलैस सड़क पर नहीं उतारी जा सकती, मगर सिरसा में सब कुछ उल्टा पुल्टा चल रहा है, जिस कारण फर्जी एंबलैंसों की बाढ़ आई हुई है। एंबूलैंसों के धंधे में मोटी कमाई देखते हुए दर्जन लोगों ने एंबूलैंस सड़क पर उतारकर सायॅरन और नीली बत्ती लगा ली है। एंबूलैंस कारोबार प्राईवेट अस्पतालों तक ही सीमित न रहकर सरकारी अस्पतालों तक पहुंच गया है, जहां प्राईवेट एंबूलैंस का जमावड़ा हर समय जमा रहता है। गरीबों  व घायलों के लिए सरकार द्वारा नि:शुल्क एंबूलैंस सेवा उपलब्ध करवाई जाती है, इसके बावजूद भी सिविल अस्पताल परिसर में प्राईवेट एंबूलैंस का बढ़ता आंकड़ा स्वास्थय विभाग के भ्रष्ट तंत्र पर सवालिया निशान अंकित करता है। 

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