गोरखधंधा : राजस्थान में घर बैठे मिल जाती है डिग्री

जोधपुर(प्रैसवार्ता)। राजस्थान पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो घर बैठे ही पंद्रह से बीस हजार रूपये लेकर जोधपुर राष्ट्रीय विश्वविद्यालय की एमए, बीए की डिग्री दिलवाता था। पुलिस के स्पैशल आप्रेशन ग्रूप ने इस संदर्भ में तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार करके पांच दिन के रिमांड पर लिया है। आरोपियों में जेएनयू का नैशनल कार्डिनेटर मनोज पारिक भी शामिल है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस अलोक त्रिपाठी ने ''प्रैसवार्ता" को बताया कि गिरफ्तार जगतपुरा निवासी मनोज पारिक, चित्तौडगढ़ निवासी श्याम सिंह और भीलवाडा निवासी दर्शित अजमेरा है। मनोज मान सरोवर के रजत पथ पर एड डू मास्टर करियर सोल्यूशन इंस्टीट्यूट व श्याम सिंह चित्तौडगढ़ में माईक्रो इंस्टीट्यूट चलाता है। उन्होंने बताया कि ये तीनों चेन सिस्टम से फर्जीवाडा करते थे। श्याम अभ्यार्थियों को दर्शित से तथा दर्शित उन्हें मनोज से मिलाता था। आडिट और सूचना के अधिकार पर जानकारी के लिए रिकार्ड पूरा रखते थे। घर बैठे कॉपी में प्रश्न-उत्तर लिखवाकर विश्वविद्यालय के रिकार्ड में लगा देते थे। अंक के लिए राशि ज्यादा ली जाती थी। आरोपियों ने पुलिस जांच में कबूल किया है कि उन्होंने मध्य प्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान व गुजरात के करीब एक हजार से ज्यादा अभ्यार्थियों को डिग्री दी है, जिनसे 15 से 20 हजार रूपये वसूले है। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपी 12वीं पास अभ्यार्थियों की अंक तालिका लेकर बीए का एनरोलमैंट नंबर करवाते और बीए की बैक डेट में परीक्षा की कॉपी भरवा लेते। 15 दिन में तीन वर्ष की अंक तालिका के साथ बीए की डिग्री बनवा देते थे। एम ऐ के लिए बीए की मूल अंक तालिका लेकर एम ऐ प्री और फाइनल की अंक तालिका और डिग्री उपलब्ध करवाते थे।

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