परिवार की आपबीती ने बदल दिया जीने का लक्ष्य - The Pressvarta Trust

Breaking

Sunday, December 21, 2014

परिवार की आपबीती ने बदल दिया जीने का लक्ष्य

लुधियाना(गौतम जालंधरी)। मेरे लिए वो समय बेहद ही असमंजस वाला रहा, जब मेरे पिता जी ने मुझे बताया कि किस प्रकार उनके पिता जी यानि मेरे दादा जी को भारत पाकिस्तान बंटवारे के दौरान हुए कत्लेआम में मार डाल था तथा हमारे पूरे परिवार को सब कुछ छोडकर पलायन करके इंगलैंड जाना पड़ा। मेरे पिता जी घटना के 66 साल के बाद भी मानसिक रूप से इस सदमे से उभर नहीं पाये। तभी मैंने सोचा कि वह ऐसे और भी मानसिक सदमे के शिकार लोगों की सहायता करूंगी। यह बात अमेरिका में बसी भारतीय मूल की प्रोफैसर शैली जैन जोकि स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की साइक्रेटिक विभाग में क्लीनिकल अस्सिटेंट प्रोफैसर है, ने जागृति लहर के साथ बातचीत में कही। शैली जैन ने कहा कि उसका जन्म लंदन में हुआ लेकिन उसका परिवार पंजाब से संबंध रखता है। उसके दादा जी वैलाती शाह जैन सिविल सर्वेंट थे तथा जेहलम (पाक) से संबंधित है। उसके पिता कैदारनाथ जबकि माता प्रतीक्षा नकोदर पंजाब से संबंधित है। शैली ने बताया कि उसके पिता ने वर्षों तक अपने पिता के साथ हुए दुखांत के दर्द को अपने सीने में पाले रखा तथा एक दिन जब हम फैमिली टूर पर जा रहे थे तो रास्ते में उन्होंने परिवार के साथ हुए हादसे के बारे में बताया। तब मुझे महसूस हुआ कि मेरे परिवार की तरह उस समय हजारों परिवारों को इस सदमे से गुजरना पड़ा होगा तथा मेरे पिता की तरह आज भी वह लोग मानसिक सदमे से गुजर रहे होंगे। शैली के अनुसार इसके बाद उसने अपनी प्राइवेट जॉब को छोड़ दिया था तथा किसी भी प्रकार के मानसिक सदमे से गुजर रहे लोगों की सहायता करने की ठानी। जिसके लिए उसने बकायदा रिसर्च की। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी अमेरिका के साइक्रैटिक विभाग में बतौर क्लीनिकल अस्सिटेंट प्रौफेसर काम करते हुए वह प्राकृतिक विपदा, युद्ध, घरेलू हिंसा, ड्रगस आदि के पीडि़त होकर मानसिक रूप से पीडि़त लोगों से मिली है तथा इनमें से कईयों को वह मानसिक सदमे से बाहर निकालने में सफल भी हुई है। शैली के अनुसार वह आल इंडिया मेडिकल इंस्टीट्यूट नई दिल्ली में लेक्चर देने आई है तथा उसकी इच्छा वह पंजाब के युवाओं,जोकि नशे में ग्रस्त है, की मदद करे। उन्होंने कहा कि नशा एक मानसिक बीमारी है तथा इससे बेहतर काउंसलिंग के सहारे आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। उन्हें यह जानकार बेहद दुख हुआ है कि पंजाब का नौजवान बुरी तरह से नशे की चपेट में आ चुका है। उन्होंने कहा कि इसके लिए केवल युवा वर्ग को दोष देना सही नहीं है, बल्कि हमें यह देखना होगा कि इसके पीछे के कारण क्या है जोकि दीमागी, सोशल व सोच हो सकते है। यदि नशा लेने के सही कारण पता लग जाए तो सही ढंग से इलाज संभव है। 

No comments:

Post a Comment

Pages