गंदी नालियों के साथ की दीवारों पर बनवाए देवताओं के चित्र : धार्मिक भावनाएं हुई आहत

लोहारू(प्रैसवार्ता)। आदि देव भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए जहां लोग उन्हें गंगाजल से नहलाते हैं और तरह-तरह के फल-फूल, धूप, अगरबत्ती, चंदन, ईत्र अर्पित कर उन्हें 56 भोग का नैवेद्य अर्पित करते हैं वहीं लोहारू नगरपालिका ने भगवान शिव और उनके अवतार बजरंग बली हनुमान जी के चित्र गंदी नालियों के साथ की दीवारों और उन स्थानों पर बनवा दिए हैं जहां कचरे के ढेर लगे रहते हैं। किसी ने स्वप्र में भी नहीं सोचा होगा कि 'मंदिर वहीं बनाएंगे'का राग आलापने वाली और हिंदुत्व की सबसे बड़ी पैरोकार मानी जाने वाली भाजपा की केन्द्र व प्रदेश में पूर्ण बहुमत वाली सरकार के होते प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए कोई निकाय या अधिकारी हिंदू देवताओं का अपमान करने का दुस्साहस भी कर सकता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार तो देव मूर्तियों व चित्रों के खंडित हो जाने पर भी उन्हें कचरे में नहीं डाला जाता अपितु विधि-विधान से पवित्र नदियों में उनका विसर्जन किया जाता है।
यहां गौरतलब होगा कि लोहारू के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के मुख्य द्वार के पास से पुराने शहर को जाने वाली गली में गंदी नाली के साथ की दीवारों पर जगह-जगह भगवान शिव और हनुमान जी के चित्र हाल ही में पेंट करवाए गए हैं। इन चित्रों पर पेंटर अवतार और 'सौजन्य से नगरपालिका लोहारू' लिखा हुआ है। गंदी नालियों के साथ की दीवारों व उन स्थानों पर जहां कि हमेशा गंदगी के ढेर लगे रहते हैं, देवताओं के चित्र बनवाने के पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि इससे लोग यहां कचरा नहीं डालेंगे। स्थानीय नागरिकों व क्षेत्र के लोगों में इस बात को काफी रोष है तथा लोगों का कहना है कि गंदी नालियों के साथ लगती दीवारों व गंदगी वाले स्थानों पर देवताओं के चित्र बनवाकर उनकी धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया गया है तथा वे न केवल इसका पुरजोर विरोध करते हैं अपितु जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने पर विचार कर रहे हैं। लोगों का साफ कहना है कि स्वच्छता अभियान को अवश्य सफल बनाया जाना चाहिए मगर इस काम में देवताओं के चित्रों का सहारा लेकर धार्मिक भावनाएं आहत करने के प्रयासों को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।
इस संबंध में जब नगरपालिका प्रधान के प्रतिनिधि के तौर पर काम कर रहे संजय खंडेलवाल से फोन पर पूछा गया तो उन्होंने बताया कि देवताओं के चित्र बनवाने के आदेश नगरपालिका ने नहीं दिए बल्कि ये चित्र बकौल खंडेलवाल एसडीएम साहब ने बनवाए हैं ताकि लोग वहां कचरा न डालें। उन्होंने कहा कि वे स्वयं इस बात के बिल्कुल पक्ष में नहीं हैं कि अस्वच्छ स्थानों पर देवताओं के चित्र बनाए जाएं। बहरहाल ये चित्र चाहे जिसके आदेश से बने हों मगर इनसे लोगों की धार्मिक भावनाएं काफी आहत हुई हैं और अगर जल्द ही इन्हें हटवाया नहीं गया तो कोई अप्रिय स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है जिसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

No comments