बस में मनचलों की पिटाई करने वाली बहनों को 'प्रत्‍यक्षदर्शियों' ने बताया झूठा

चंडीगढ़(प्रैसवार्ता)।  हरियाणा रोडवेज की चलती बस में छेडख़ानी के आरोप में लड़के की पिटाई करते हुए वीडियो सामने आने के बाद चर्चा में आई रोहतक (हरियाणा) की दो बहनों (पूजा और आरती) को उन्‍हीं के गांव की महिलाओं ने झूठा बताया है। गांव की पंचायत भी पूरी तरह से युवकों के पक्ष में आ गई है। युवकों को कोर्ट से भी जमानत मिल गई है।  मंगलवार को दोनों बहनों को हिंदू महासभा ने सम्‍मानित किया। हिसार की जनवादी महिला समिति ने भी दोनों का सम्मान किया। लेकिन लड़कियों के गांव की महिलाओं का कहना है कि बस में हुई घटना में लड़के पूरी तरह निर्दोष थे और सारी गलती लड़कियों ने ही की थी। आसन (पिटे लड़के का गांव) की पंचायत पूरी तरह से लड़कों के पक्ष में आ गई है और उन्‍हें बेकसूर बताया है। गाववालों ने पांच महिलाओं को मीडिया के सामने पेश किया। ये उसी बस में सफर कर रही थीं। इनमें से चार महिलाओं ने खुद को घटना का चश्मदीद बताया। ये चारों महिलाएं लड़कियों के गांव थाना खुर्द की ही हैं। उन्होंने युवकों को बेकसूर बताया। इस संबंध में उन्होंने पुलिस में शपथ पत्र भी दिया है।  जो महिलाएं मीडिया के सामने आईं हैं, उनमें से तीन का नाम विमला है। एक महिला ने बताया कि एक लड़के ने एक बीमार बुजुर्ग महिला का टिकट लिया। उसकी सीट नंबर 8 थी। उस पर सीट पर दो लड़कियां बैठी थीं। युवक ने बीमार के लिए सीट छोडऩे को कहा तो वे भड़क गईं। बात बढ़ गई और दोनों लड़कियों ने मारपीट शुरू कर दी। दो लड़के बस में थे, जबकि तीसरा रास्‍ते में (भालौठ से) बस में चढ़ा था। मीडिया में एकतरफा खबर दिखाई है। तीनों लड़के बेकसूर हैं। चाहे यहां गवाही दिलवा लो या चंडीगढ़ में। बुढ़ापे में झूठ नहीं बोलूंगी। अन्य महिलाओं ने भी यही कहा कि लड़कों ने न तो छेड़छाड़ की और न ही मारपीट। अगर पक्ष लेना होता तो हम अपने गांव की बेटियों का लेतीं, लेकिन मामला न्याय और सच्चाई का है। लड़कों की गलती नहीं, उसे सजा कैसे होने देंगे। आसन गांव के ग्रामीणों का कहना है कि लड़कियों के अनुसार बस में मारपीट की वीडियो बस में बैठी एक गर्भवती महिला ने बनाई थी, जबकि चश्मदीद महिलाओं का कहना है कि वीडियो उन लड़कियों के साथ की तीसरी लड़की ने बनाई। अगर लड़कियों की बात में सच्चाई है तो वीडियो बनाने वाली महिला को सामने लाएं।

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