थम नहीं रहा हरियाणा कांग्रेस का आपसी कलह - The Pressvarta Trust

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Tuesday, December 23, 2014

थम नहीं रहा हरियाणा कांग्रेस का आपसी कलह

सिरसा(प्रैसवार्ता)। आपसी कलह के चलते हुई राजनीतिक दुर्गति के बावजूद भी हरियाणा कांग्रेस में आपसी कलह थमने का नाम नहीं ले रही, बल्कि तेजी पकड़ रही है। हरियाणा में कांग्रेसीजन मौजूदा प्रधान डॉक्टर अशोक तंवर तथा विधायिका किरण चौधरी नेता विधायक दल कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच चल रही जंग से परेशान है और यहीं परेशानी उन्हें हृदय परिवर्तन की तरफ मोड़ सकती है। राज्य के कई जिलों में हुए कार्यकर्ताओं की बैठकों में भूपेंद्र हुड्डा दिखाई नहीं दिए , बल्कि हुड्डा पर की गई टिप्पणी को लेकर हुड्डा समर्थकों द्वारा हंगामा भी किया गया है। कांग्रेस की हुई सभी बैठकों में गुटबाजी खुलकर देखी गई है। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष  अशोक तंवर अनुशासनहीन लोगों तथा पार्टी प्रत्याशियों का विरोध करने वाले कांग्रेसियों पर कार्रवाई का राग तो अलाप रहे है, मगर कार्रवाई कब करेंगे, को लेकर उनके पास कोई जवाब नहीं है।  तंवर और किरण चौधरी के नहले पर दहला मारते हुए हुड्डा ने रोहतक में कार्यकर्ता सम्मेलन करके अपनी शक्ति का प्रदर्शन दिखा दिया है, जिसमें कांग्रेस के 15 विधायकों में से 14 ने उपस्थिति दर्ज करवा कर हुड्डा के कार्यकाल की सराहना की और तंवर व किरण चौधरी को पैराशूट नेता बताकर भडास निकाली। तंवर व किरण का कहना है कि कांग्रेस में कोई गुटबंदी नहीं है, जबकि हरियाणा का राजनीति  इतिहास कांग्रेस में गुटबंदी से हरियाणा का पुराना रिश्ता दर्शाता है। हुड्डा और भजनलाल की गुटबंदी के चलते भजनलाल ने कांग्रेस को अलविदा कहकर नई पार्टी बनाई, जबकि वीरेंद्र डूमरखां ने कांग्रेस छोड़कर भाजपाई ध्वज उठाया। सांसद सुश्री शैलजा, पूर्व विधायक नरेश सेलवाल, पूर्व सांसद अवतार सिंह भडाना व ईश्वर सिंह पूर्व विधायक धर्मवीर मौजूदा सांसद, पूर्व विधायक कैप्टन अजय सिंह, किरण चौधरी अक्सर पूव्र मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा की बगावत करते देखे गए, जिस कारण कांग्रेसी जन कांग्रेस से दूरी बनाते चले गए और परिणामस्वरूप कांग्रेस का आपसी कलह एक दशक तक सत्ता में रहने के बावजूद विपक्षी नेता का पद तक नहीं पहुंच पाया। कांग्रेस के आपसी कलह के चलते कांग्रेस में दाल जूतियों में बंट रही है, वहीं प्रमुख विपक्षी दल इनैलो भी विधानसभा चुनाव में मतदाताओं द्वारा दिए गए राजनीतिक घाव पर मरहम लगा रहा है, जबकि भाजपा मुद्दे छोडऩे के बावजूद भी उन्हें कैश न कर सकने की स्थिति में पहुंच चुकी इनैलो तथा कांग्रेस की तरफ टिकटिकी लगाए हुए मजे से सरकार की रफ्तार को बढ़ा रही है। 

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