41 साल से 1 रूपये 04 पैसे की हो रही है रखवाली - The Pressvarta Trust

Breaking

Monday, January 5, 2015

41 साल से 1 रूपये 04 पैसे की हो रही है रखवाली

जयपुर(प्रैसवार्ता)। चार दशक पूर्व रिश्वत के मामले में पकड़ी गई एक मामूली राशी की रखवाली में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरों(ऐसीबी) को पसीने आ रहे है। कई मामलों में बंद होने के बावजूद भी यह रकम मालखाने में सुरक्षित तो है, लेकिन रजिस्ट्रार न मिलने के चलते यह पता नहीं चल रहा कि रकम किसने दी थी।  गल रहे 10, 20 और 50 रूपये के नोट को संभालना गले की फांस बन गया है। ''प्रैसवार्ता" को मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 1973 में 103 नंबर की एफआईआर में एसीबी ने एक सरकारी कर्मचारी को एक रूपये चार पैसे रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। इससे संबंधित मामला तो बंद हो गया, मगर रिश्वत की यह राशी सरकारी मलखाने में है। अधिकारी-कर्मचारियों तक को यह पता नहीं कि रिश्वत किसने दी थी। बावजूद इसके इसे कब कौन लेने आ जाए, उसे संभाले हुए है। 1982 में एसीबी ने 86 नंबर की एफआईआर दर्ज कर रिश्वत के 20 रूपये जब्त किए। इसमें नगर परिषद जयपुर के सत्य नारायण शर्मा को आरोपी बनाया था। यह रिश्वत झुनझून में युनानी दवाखाना चलाने वाले एम ए हफीज ने एक प्रमाण पत्र बनाने की ऐवज में दी थी। मामले में एफआईआर 1983 में लग गई, लेकिन एसीबी आजतक हफीज को खोज नहीं सकी। सूत्रों के मुताबिक करीब डेढ़ सौ ऐसे मामले है, जबकि काफी संख्या में खराब सामान मालखाने मे पड़ा हुआ है। नवजात की तरह संभाल रहे नोट मालखाने में नोट के अतिरिक्त पर्स, पेन, बीडी के बंडल व अन्य सामान रखा है। पर्स व कई ऐसे सामान है, जिन्हें दीमक से बचाने के लिए सालभर में एक बार तो एल्ड्रीन से साफ किया जाता है। जब्त नोट गलने लगे है, मगर फिर भी कर्मचारी इन नोटों को नवजात शिशु की तरह संभाल रहे है। दर्ज मुकद्दमे में नोट का नंबर लिखा होने की वजह से उन्हें बदला भी नहीं जा सकता। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक के वर्ष 2005 से पहले के पुराने नोट बाजार में न चलने के निर्देश से भी इन पुराने नोटों पर सवाल उठ रहे है।

No comments:

Post a Comment

Pages