बाजवा के बाद अशोक तंवर की विदाई की पटकथा तैयार

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा तथा पंजाब में कांग्रेस की बिगड़ रही राजनीतिक तस्वीर तथा गूंज रहे बगावती स्वरों पर अंकुश लगाने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने ठोस कदम उठाने का फैसला कर लिया है, जिसके चलते पंजाब कांग्रेस के प्रधान प्रताप सिंह बाजवा तथा पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह के बीच छत्तीस का आंकड़ा को देखते हुए बाजवा की प्रधानगी किसी कैप्टन समर्थक को सौंपने का मन बना लिया है, क्योंकि कांग्रेस हाईकमान समझ गया है कि बाजवा के रहते कांग्रेसी बगावत पर ब्रेक नहीं लगाया जा सकता। पंजाब कांग्रेस में कैप्टन सिंह के समर्थकों का आंकड़ा बहुत ज्यादा है। कैप्टन सिंह की कांग्रेस से अलविदाई की चर्चा ने कांग्रेसी हाईकमान को सचेत कर दिया, कि उसे पंजाब में कांग्रेसी बगावत रोकने के लिए अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। शायद यहीं कारण है कि कांग्रेस आलाकमान ने कैप्टन सिंह के समक्ष घुटने टेक दिए है और उनकी सभी शर्तों को स्वीकार कर लिया है। कैप्टन सिंह के साथ कांग्रेसी सांसदों, विधायकों, पूर्व सांसदों व पूर्व विधायकों की लंबी फौज है, जिसका प्रमाण वह 19 दिसंबर को पटियाला में आयोजित बैठक में चुके है। पंजाब जैसी राजनीतिक स्थिति हरियाणा कांग्रेस की है।  हरियाणा के एक मात्र कांग्रेसी सांसद व मौजूदा 15 कांग्रेसी विधायकों का खुला समर्थन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा को है, मगर विधायक दल की नेता किरण चौधरी व पार्टी प्रधान अशोक तंवर है, जिनका हुड्डा से छत्तीस का आंकड़ा है। प्रदेश में तंवर और किरण चौधरी ने, जितनी भी कार्यकर्ता बैठकें की है, लगभग सभी हंगामा हुआ है, क्योंकि ज्यादातर कांग्रेसजन प्रदेश में पार्टी की मौजूदा स्थिति के लिए तंवर को ही जिम्मेवार मानते है। कैप्टन सिंह की तर्ज पर चल रही हुड्डा को भी उम्मीद है कि उनके भी अच्छे दिन आने वाले है, क्योंकि राज्य की पार्टी तस्वीर को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस हाईकमान ने तंवर की विदाई की पटकथा भी तैयार कर ली है, जिस पर कभी भी अमलीजामा पहनाया जा सकता है, जबकि विधायक दल की नेता किरण चौधरी अभी अपने पद पर बनी रहेगी। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस आलाकमान ने हुड्डा तक संदेश पहुंचा दिया है कि उनकी इच्छाओं पर खरा उतरने के लिए पार्टी तैयार है, इसलिए किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न की जाए।

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