खट्टर सरकार का बढ़ेगा आंकड़ा, लालबत्ती के इच्छुकों ने बढ़ाए प्रयास

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हरियाणा यात्रा, दिल्ली विधानसभा के चुनाव तथा भाजपा के 31 मार्च तक के सदस्यता अभियान की समाप्ति उपरांत कभी भी अपनी सरकार में वृद्धि कर सकते है। प्रैसवार्ता को मिली जानकारी के अनुसार खट्टर मंत्रीमंडल में चार नए मंत्री, करीब आधा दर्जन मुख्य संसदीय सचिव बनाए जा सकते है, जबकि कई मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव किया जा सकता है। स्पष्ट बहुमत वाली खट्टर सरकार में भागीदारी करके लालबत्ती वाली गाड़ी के इच्छुकों की एक लंबी कतार है, जिसमें दागी, बागी व अवसरवादी राजसी दिग्गज में स्वपन संजोए हुए है। फरवरी माह के अंतिम सप्ताह में होने वाले बजट सत्र समारोह के  साथ ही मंत्रीमंडल में विस्तार, भाजपाई दिग्गजों को बोर्र्ड-निगमों की चेयरमैनी देने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, जबकि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व 31 मार्च बाद लालबत्ती कार वाली पिटारी खोलने के पक्ष में है। वर्तमान में केंद्र सरकार में 6 कैबिनेट मंत्री है और दो कैबिनेट तथा दो राज्य मंत्री बनाए जा सकते है।  मंत्रीमंडल में इस बार जिलों की बजाए संसदीय क्षेत्रो को प्रतिनिधित्व दिए जाने पर विचार चल रहा है। सिरसा ससंदीय क्षेत्र के नौ विधानसभा क्षेत्रों में से आठ पर इनैलो तथा एक पर भाजपा का कब्जा है और भाजपाई विधायक भाजपा में प्रांतीय प्रधान पद पर सुशोभित है। ऐसे में किसी पराजित चेहरे की लॉटरी खुल सकती है। पूर्व आयकर अधिकारी एवं भाजपाई प्रवक्ता सुनीता दुग्गल की लालबत्ती वाली कार यकीनी मानी जा रही है, जिसे किसी भी महत्वपूर्ण निगम की चेयरपर्सन बनाया जा सकता है। लालबत्ती वाली कार के लि भाजपाई दिग्गज व भाजपाई ध्वज उठाने वाले अवसरवादी राजनेताओं ने लॉबिंग शुरू कर दी है। चर्चा तो यह भी है कि विधानसभा स्पीकर को भी मंत्री बनाया जा सकता है। वैसे मंत्रीपद की दौड़ में इनैलो के प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा को हराने वाले सुभाष सुधा, रोहतक सिटी से विजयी परचम लहराने वाले मनीष ग्रोवर, गुडग़ांव के विधायक उमेश अग्रवाल, बडखल की विधायिका सीमा त्रिखा तथा हिसार के विधायक डॉ. कमल गुप्ता भी है। मुख्य संसदीय सचिव , बोर्ड या निगमों के चेयरमैन बनकर ही तसल्ली करने वाले विधायकों में पंचकुला के विधायक ज्ञान चन्द गुुप्ता, घरौण्डा के विधायक हरविन्द्र कल्याण, फरीदाबाद के विधायक विपुल गोयल, भिवानी के विधायक धनश्याम सर्राफ, नारायणगढ़ के विधायक नायाब सिंह सैनी, रादौर के विधायक श्याम सिंह राणा, असंध के विधायक बख्शीश सिंह, मुलाना से विधायिका संतोष सारवान, पानीपत(ग्रामीण) के विधायक महीपाल ढांडा इत्यादि शामिल कहे जा सकते है, जिनका दावा तो मंत्रीमंडल में शामिल होने का है, मगर सफलता न मिलने पर मुख्य संसदीय सचिव या चेयरमैन भी स्वीकार कर सकते है। मुख्यमंत्री मंत्रीमंडल के विस्तार के साथ ही कई मौजूदा मंत्रियो के विभागों में भी बदलाव कर सकते है, जबकि कई राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार भी पास सकते है, जबकि कई मंत्रियों को महत्वपूर्ण विभाग भी सौंप सकते है। भाजपा में विधानसभा उपाध्यक्ष के लिए भी लांबिग चल रही है, जिसके लिए इनैलो छोड़कर भाजपा टिकट से विजयी हुए कृष्ण कुमार पंवार तथा नीलोखेडी के विधायक भगवान दास कबीर पंथी चर्चा में है, मगर अभी तक कबीर पंथी चर्चा में आगे है, जबकि मौजूदा स्पीकर कंवरपाल गुर्जर को मंत्री बनाया जा सकता है, तो लतिका शर्मा को जिम्मेवारी दी जा सकती है। लालबत्ती वाली कार पाने वालों की एक लंबी कतार है, मगर दागी, बागी व अवसरवादी इस कतार में बहुत पीछे दिखाई दे रहे है।

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