बुरे दिनों में कांग्रेसियों ने बनाई कांग्रेस से दूरी

सिरसा(प्रैसवार्ता)। लोकसभा चुनावों के बाद हरियाणा में हुए विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने कांग्रेस प्रत्याशियो को ऐसी राजनीतिक पटकनी दी है कि उन्हें अब कांग्रेस एक बोझ लगने लग गई है और ज्यादातर ने कांग्रेस पार्टी के कार्यक्रमों से दूरी बनाने को अधिमान दे दिया है। कांग्रेस भवन कभी कांग्रेसी दिग्गजों से अटपटा रहता था, मगर अब ज्यादातर कांग्रेसी कांग्रेस भवन के अंदर आना तो दूर, उस सड़क से भी नहीं गुजरते। कांग्रेस भवन कांग्रेसी दिग्गजों के न आने से सूना-सूना नजर आ रहा है। वैसे भी कांग्रेसी दिग्गज पार्टी से नजरें बचाकर चल रहे है, हालांकि कांग्रेस के प्रत्याशी रहे नवीन केडिया की डफली जरूर कांग्रेस भवन में कभी कभार बजती रहती है। अखबारी सुर्खियों में रहने वाले कुछ दिग्गजों की विज्ञापनबाजी तो दूर, प्रैस विज्ञप्तियां तक गायब हो गई है। कई ऐसे कांग्रेसी दिग्गज भी है, जिसका हृदय आस्था बदलने के लिए हिलोरे खा रहा है, जो कभी भी कांग्रेस को बायॅ-बायॅ कह सकते है। प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने अपनी कार्यकारिणी को भंग किया हुआ है, जिस कारण संगठनात्मक ढांचा गडबड़ाया हुआ है, क्योंकि प्रदेश में कांग्रेसी कलह इस कद्र बढ़ चुका है कि कोई भी बैठक बगैर किसी हंगामें के समाप्त नहीं होती। पार्टी प्रधान अशोक तंवर और कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी को कांग्रेसीजन स्वीकार नहीं कर रहे, जबकि भूपेंद्र सिंह हुड्डा को आलाकमान ने नकार रखा है। हरियाणा में कांग्रेसी कलह ने ऐसी स्थिति उत्पन्न कर दी है कि कांग्रेसी स्वयं कांग्रेसी कहने से भी कतरा रहे है। कांग्रेसीजन इस उलझन में उलझ कर रह गए है कि वह जायें, तो जायें कहां?

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