पेरिस के जाबाज पत्रकारों को याद करते हुए: अगर हमारी कलम बन्दूक का सामना करने को तैयार नहीं तो अगला नम्बर हमारा है!

उन्होंने बन्दूक को फिर से कलम के मुकाबले में ला खड़ा किया। हरियाणा में पत्रकार छत्रपति की विरासत के पत्रकार इस बात को बेहतर समझ सकते है। 
कोई भी धर्म या विचारधारा इंसानियत से बढ कर नहीं होती धर्म के नाम पर हिंसा को जायज नहीं ठहराया जा सकता। पर दिमागी रूप से बिमार मानसिकता के लोगों को यह समझाना बेहद कठिन होता जा रहा है कि इस तरह के हमले वहशीपन है धर्म युद्ध नहीं। जटीलता ये भी है जब कुछ कुन्ध मानसिक रोगी खुले आम या दबे-छुपे इन हमलों भी अपना हित साधने की कोशिश करते हुए एक धर्म को दूसरे से बेहतर बताने की कोशिश करते है। आइए इस घटना के विभिन्न को जानने की कोशिश करते है।
अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता पर हमला- पेरिस में व्यंग्यात्मक मैगजीन शार्ली एब्दों के ऑफिस पर तीन आंतकवादियों ने हमला करके बुद्धवार 12 लोगों की हत्या कर दी गई, 10 अन्य घायल हो गए,इसमें दो पुलिसकर्मी भी शामिल है। मौका वारदात के ब्यान अनुसार हमलावर चिल्ला रहे थे कि हमने पैगम्बर का बदला ले लिया है। मैगजीन एडिटर-इन-चीफ स्टीफेन की आंतकी हमले में मौत हो गई। प्रेंच मिडिया द्वारा हमलावरों का अलकायदा से सम्बध बताया जा रहा है। ताजा जानकारी में हमले में जुड़े युवा हमलावर मोराद ने बुद्धवार रात 11 बजे खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। कटटरपंथी हमले में मारे गए पत्रकारों के समर्थन में दुनिया भर के मिडिया सहित अन्य तबकों से श्रंदाजलि संदेश सोशल मिडिया पर आ रहे है। जिसमें मानवता के हत्यारों को लानते भेजी जा रही है।
मैगजीन का इतिहास
साप्ताहिक पत्रिका शार्ली अपने छपने कार्टूनों को लेकर हमेशा चर्चा में रहती है। वर्ष 2012 में पैगंबर मोहम्मद का कार्टून बनाने को  लेकर विशेष चर्चा में रही। मैगजीन ने हाल ही में आतंकी संगठन आईएस के चीफ बकर अलबगदादी का भी कार्टून छापा था। मैगजीन में ईसा मसीह, ईसाइयत और फ्रंास के नेताओं पर भी करारे व्यंग्य किए है। फा्रंस में सिर उठाते कटटरपंथीयों को लेकर समय-समय पर सवाल भी उठाए गए,  2011 नवम्बर 2 को भी मैगजीन के आफिस में फायर बम्ब से हमला किया गया तथा मैगजीन की साईट को हैक कर लिया गया जिसके बाद मैगजीन को नए ऑफिस में शिफट होना पड़ा। मैगजीन ने इसके बाद 2012 में कार्टूनों की पूरी सीरीज को छापा। यह सीरीज उस वक्त छपी जब इस्लाम पर आधारित एक फिल्म के विरोध में मिडल ईस्ट में अमेरिका के दूतावासों पर हमले हुए थे। पर मैगजीन ने अभिव्यक्ति की स्वतत्रता को लेकर कभी भी कोई समझौता नहीं किया। 
कटटरता का धर्म कत्ल
यह फार्मुला संसार के सभी धार्मिक कटटरपथी, अन्ध-धर्मीयों ने अपना रखा है वे अपने विरोधी विचार को कल्त कर शान्त करने में यकीन रखते है। यही उन्होंने फ्रांस में जाबाज पत्रकारों के साथ किया जब वो कलम के सिपाई धमकियों से नहीं डरे तो आंतकियों ने बन्दूक की गोलियँा उनकी छाती में निर्ममता से उतार दी।  प्रेस पर किया गया ये कु्रर हमला बेहद निन्दनीय है। ऐसे समय में जरूरी हो जाता है विश्व के अन्य पत्रकार साथी अपनी एकजुटता दिखाते हुए शार्ली मैगजीन के रूके काम का आगे बढाए। 
एकजुट विरोध जरूरी
ऐसे समय में शहीद भगत सिंह की जेल डायरी में दर्ज माक्र्स की नोटस का उल्लेख करना जरूरी हो जाता है कि धर्म अफीम है। निसन्देह इसी नशें में इन्सान हैवान बन जाता है। पर इसी बीच कुछ लोग प्रकाश पुंज बन रहे है। एक साईट पर मुस्लिम साथियों ने खुलेआम लिखा एक - मैं मुस्लिम हँू और मेरा मानना है कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब है इस्लाम समेत हर धर्म पर व्यंग्य करना, एक दूसरे मुस्लिम ने लिखा कि- मेरा परिवार फ्रेंच है मेरा परिवार मुस्लिम है मैं पत्रकार हँू हम दूख में है। दूनिया भर से इस हमले के विरोध में आवाज बुलन्द हो रही है। हिम्मत दिखाते हुए उन कार्टुनों को पोस्ट किया जा रहा है जो काम मैगजीन कर रही थी। इस बीच यह बात सौ प्रतिशत सच है कि दुनिया को खतरा उन 1 प्रतिशत लोगों से नहीं है जो आंकतवाद फैलाते है। बल्कि खतरा उन 99 प्रतिशत लोगों से है जो उन 1 प्रतिशत की करतूतों पर चुप्पी साध लेते है। पत्रकारों पर अभिव्यक्ति पर इस कु्रर, वहशी हमले के जवाब में हर कलम के सिपाई को लिखना होगा, समझना होगा ये आग किसी की सगी नहीं हर देश की सीमा के बाद ये रूप बदलती है। इसका धर्म घर जलाना है, आंतक फैलाना है। इनका धर्म कुछ भी हो सकता है पर ये मानव नहीं हो सकते।(नवल सिंह, प्रैसवार्ता) 

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