काले धन को सफेद करने के लिए संत से हीरो बने है बाबा राम रहीम

सिरसा(प्रैसवार्ता)। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा राम रहीम ने जब से अपनी पहली फिल्म एमएसजी बनाई है, तब से वे आए दिन अखबारों की सुर्खियां बन रहे है। बाबा की फिल्म का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा। हालांकि पहले तो सेंसर बोर्ड ने फिल्म को अनुमति देने से मना कर दिया था, उसके बाद बाबा की फिल्म का प्रीमियर देखने जा रहे 7 लोगों में से 4 ने सड़क हादसे में अपनी जान गवां दी और अब इनैलो के छात्र संगठन इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला ने बाबा पर फिल्म के जरिए काले धन को सफेद करने का आरोप लगाया है। कहीं सिखों का विरोध, तो कहीं राजनीतिक दलों का विरोध और सिरसा जिले में धारा 144। फिल्म को लेकर डेरा समर्थकों का कहना है कि इस फिल्म में लोगों में इंंसानियत जागेगी, समाजिक बुराईयां दूर होंगी...वगैरा वगैरा। लेकिन दिग्विजय चौटाला का कहना है कि अगर फिल्म समाज में बुराईयों को खत्म करने के उद्देश्य से बनाई गई है, तो ये नि:शुल्क होनी चाहिए। इसके लिए किसी से टिकट के पैसे नहीं लेने चाहिए, क्योकि संतों का काम देना होता है, लेना नहीं। कुछ इस तरह के आरोप दिग्विजय ने मंगलवार को बरनाला रोड़ स्थित चौटाला हाऊस में लगाए। प्रैसवार्ता को प्राप्त जानकारी के अनुसार दिग्विजय चौटाला ने पत्रकार वार्ता में कहा कि बाबा राम रहीम ने यह फिल्म काले धन को सफेद करने के लिए बनाई है, जब उन्होंने बाबा राम रहीम की इस सत्यता को उजागर करने का प्रयास किया, तो उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलने लगी, जो अभी तक मिल रही है, जिसकी शिकायत वे जल्द ही पुलिस प्रशासन से तथ्यों के साथ करेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा कहा जा रहा है कि चौटाला परिवार भी अक्सर डेरा जाता रहा है मगर वे दावा कर सकते हैं कि चौटाला परिवार के किसी भी सदस्य ने कभी भी डेरा प्रमुख से राजनीतिक संरक्षण नहीं मांगा। उन्होंने कहा कि अब से पूर्व ये माना जाता था कि जो भी डेरा प्रमुख के खिलाफ आवाज उठाता था, उसे किसी न किसी रूप में दबा दिया जाता था मगर इनेलो किसी भी सूरत में जनभावनाओं के अनुरूप अपनी आवाज को दबने नहीं देगा और पल-पल सरकार को डेरा प्रमुख की काली करतूतों और कुकर्मों के प्रति सजग करता रहेगा। इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख द्वारा अभिनीत फिल्म एमएसजी के प्रदर्शन के संदर्भ में बीती 11 जनवरी को गुडग़ांव में करीब 3 लाख लोगों को प्रीमियर दिखाने का प्रयास किया गया। अहम बात यह है कि इस प्रीमियर के लिए लोगों को 2 हजार रुपए की टिकट बेची गई थी। उन्होंने कहा कि ये आश्चर्यजनक है कि ये टिकट किसी सिनेमाघर की ओर से नहीं बल्कि प्रोडेक्शन कंपनी की ओर से बेचे गए थे। सेंसर बोर्ड से पास किए हुए ही इन टिकटों से करीब 15.7 करोड़ रुपए कमा लिए गए जबकि फिल्म रिलीज भी नहीं की गई। आखिर टिकटों के रूप में कमाए गए वे 15 करोड़ रुपए कहां गए? उन्होंने कहा कि डेरा प्रमुख रूबरू नाइट्स के माध्यम से भी अरबों के वारे न्यारे किए हुए हैं जिनका हिसाब किताब किसी के पास नहीं है। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि क्या प्रदेश की भाजपा सरकार विस चुनावों के दौरान डेरा द्वारा की गई मदद का एहसान चुका रही है? इनसो अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें लगता है कि हालात के मुताबिक दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद ही एमएसजी फिल्म रीलिज होगी। उन्होंने कहा कि सेंसर बोर्ड की ओर से पास हुए बिना ही इस फिल्म के राइट बेचने और खरीदने वाले दोनों ही दोषी हैं। उन्होंने इस मामले में सरकार का टैक्स चोरी से संबंधित तमाम तथ्य एवं दस्तावेज जुटाकर गुडग़ांव स्थित आयकर विभाग के आला अधिकारियों के पास उपलब्ध कराए हैं, मगर अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा सका है जो दुर्भाग्यपूर्ण है। युवा नेता ने कहा कि एक ओर डेरा प्रमुख कहते हैं कि उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के शमन के लिए ये फिल्म बनाई है तो वे ये साबित करें कि आखिर समाज में सिगरेट पीने पर प्रतिबंध लगा है अथवा शराब पीने पर? दिग्विजय सिंह चौटाला ने कहा कि वे फिल्म का विरोध इसलिए नहीं कर रहे कि चुनावों में डेरा ने उन्हें समर्थन नहीं दिया बल्कि इसलिए कर रहे हैं कि इस फिल्म के माध्यम से आमजन के पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इनसो प्रजातांत्रिक व्यवस्था में रहकर इस फिल्म का विरोध जारी रखेगा।

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