लाश का आपरेशन कर सिरसा का डॉक्टर बोला आइ एम सॉरी

सिरसा(प्रैसवार्ता)। जी हां! घरवालों की मानें, तो सिरसा शहर के एक डॉक्टर मंसूर अहमद, जो डबवाली रोड़ स्थित गणेशा अस्पताल का संचालक है, ने कुछ ऐसा ही किया है। इस डॉक्टर ने 42 वर्षीय दौलतराम नामक एक मरीज का आपरेशन कर दिया, जो कायदे से मर चुका है। कुछ ऐसे ही आरोप मरीज के परिजनों ने डॉक्टर अहमद पर लगाए। परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉ. अहमद ने उनके साथ धोखा किया है। एक तो मरीज में पहले ही जान नहीं थी, दूसरा डॉक्टर ने उसका आपरेशन कर दिया और जब डैडबॉडी ले जानी चाही, तो डॉक्टर अहमद ने यह कहकर रोक दिया कि पहले मरीज पर खर्च हुए ढाई लाख रूपये अदा करो। प्रैसवार्ता को सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार गांव बनसुधार निवासी 42 वर्षीय दौलतराम बिजली बोर्ड में कार्यरत था। बुधवार को वह बिजली बोर्ड के एक एसई को कहीं लेकर गया था। अचानक उसकी तबियत खराब हो गई, तो वह घर आ गया। तबियत बिगडऩे पर दौलतराम के परिजन उसे पूनिया नर्सिंग होम ले गए, जहां डॉक्टर पूनिया ने उन्हें साफ कह दिया कि इसे घर ले जाए। दौलतराम के परिजन दौलतराम को घर ले जाने की बजाए चैकअप के लिए डबवाली रोड़ स्थित गणेशा अस्पताल ले गए, जहां अस्पताल के संचालक डॉ. मसूर अहमद ने मरीज को देखकर अपनी कार्रवाई शुरू कर दी। डॉ. अहमद मरीज को आपरेशन थियेटर ले गए और करीब आधे घंटे बाद बाहर आकर कहा आइ एम सॉरी। सूत्रों के अनुसार मरीज के परिजनों ने डॉ. अहमद से कहा कि उन्हें दौलतराम की डैडबॉडी ले जाने दो, इस पर डॉ. अहमद ने कहा कि पहले आपरेशन की रकम ढाई लाख रूपये अदा करें, फिर डैडबॉडी ले जाए। इस पर परिजनों ने डॉ. अहमद से कहा कि मरीज में पहले से जान ही नहीं थी, तो मरे हुए इंसान का आपरेशन आपने कैसे कर दिया। आपने आपरेशन किससे पूछकर किया है। आपको आपरेशन करने से पहले हमें बताना चाहिए था। इस पर तकरार हो गई और विवाद खड़ा हो गया। डॉ. अहमद से जब इस मामले को लेकर बात की गई, तो उन्होंने कहा कि मरीज हमारे पास सुबह 10 बजे आया था, उस समय उसकी हालत काफी नाजुक थी। हमने आपरेशन किया है, जिस पर करीब एक लाख रूपये खर्च हुआ है। दोपहर एक बजे हमने मरीज को मृत घोषित कर दिया था। दो घंटे तक मरीज के परिजन डैडबॉडी लेने नहीं आए। एक गलत फहमी के चलते विवाद खड़ा हो गया था, वरना हमनें डैडबॉडी ले जाने के लिए किसी को कभी मना नहीं किया। मरीज के परिजनों की डिटेल को लेकर जब डॉ. अहमद से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि मेरे पास मरीज का नाम व पता तो है, मगर उसका कोई संपर्क नम्बर नहीं है। बार-बार पूछने पर उन्होंने कहा कि ये डिटेल कपिल नामक एक शख्स के पास है, जो डबवाली रोड़ स्थित आस्था अस्पताल में कार्यरत है। कपिल से जब मरीज के बारे में पूछा गया, तो वे बोले, आपरेशन जरूरी था, जो कर दिया। मरीज का फार्म हमने भरा तो था, मगर संपर्क नम्बर मेरे पास नहीं है, वो डॉ. रजनीश के पास है, जो इसी आस्था अस्पताल में है, उनसे आप ले लो। डॉ. रजनीश से पूछा गया, तो वे बोले सॉरी हम नंबर लिखना ही भूल गए। हम केवल आपको मरीज का नाम व पता ही बता सकते है। बार-बार मरीज या मरीज के परिजनों का मोबाइल नम्बर पूछने पर भी अस्पताल प्रशासन की ओर से नहीं दिया गया, जिससे जाहिर होता है कि कुछ न कुछ तो गड़बड़ी है।

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