हरियाणा कांग्रेस को रास आ रहा है किसान, कर्मचारी और जाट आंदोलन

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा की भाजपा सरकार ने अपने पांच महीनों के कार्यकाल में प्रदेशवासियों के लिए  तो कुछ नहीं किया, बल्कि कोप भवन में चली गई कांग्रेस को जरूर संजीवनी दे दी है। हरियाणा में मौजूदा खट्टर सरकार के खिलाफ किसान, कर्मचारी और जाटों ने कमर कस ली है और कांग्रेस वैंटिलेयर से बाहर आकर भूमि अधिग्रहण बिल, जाट आरक्षण, कर्मचारियों की नाराजगी, स्वामी नाथन् आयोग की रिपोर्ट के साथ ही कुदरती विपदा से प्रभावित किसानों की फसल जैसे मुद्दों को भुनाने में जुट गई है। राज्य का प्रमुख विपक्षी दल इनैलो इन मुद्दों को गंभीरता से नहीं ले रहा, जिसे लेकर इनैलो के राजनीतिक भविष्य पर सवालिया निशान लगने शुरू हो गए है। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर ने सक्रियता तो बढ़ा दी है, मगर उनके साथ कांग्रेसीजनों की भारी कमी देखी जा सकती है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का जनाधार काफी कहा जा सकता है। लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव परिणाम से हाशिए पर चली गई कांग्रेस को भाजपा के खाली चुनावी पिटारी ने संजीवनी दे दी है। सोनियां गांधी के हरियाणा दौरे से कांग्रेस किसानों को यह समझाने में सफल रही है कि कांग्रेसी शासन में तो भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल 2013 पास कर अंग्रेजों के समय से चले आ रहे काले कानून में संशोधन करने, हरियाणा में जाटों को आरक्षण पर स्वीकृति दी थी, जिसे सत्ता में आते ही भाजपा ने रद्द कर नया बिल लोकसभा में पास कर लिया और जाट आरक्षण की भी न्यायालय में ठीक ढंग से पैरवी नहीं की। राज्य में जाटों को ही किसान माना जाता है। कांग्रेस सुप्रीमों को शायद ऐसी संभावना नहीं थी कि उनका दौरा न सिर्फ किसानों पर जादू कर जाएगा, बल्कि कांग्रेस को भी ऑक्सीजन दे सकता है। सोनिया के दौरे ने भाजपा की बेचैनी बढ़ा दी है। भाजपा आलाकमान तक भाजपाई सांसद व विधायक स्पष्ट कर चुके है कि आने वाले दिनों में हरियाणा के जाट बनाम किसानों की नाराजगी दूर न की गई, तो ये नाराजगी भाजपा पर भारी  पड़ सकती है, क्योंकि स्वामी नाथन् की रिपोर्ट को भाजपा ने ही ठंडे बस्ते से निकाला।  जिस भूमि का इस्तेमाल नहीं हुआ, उसका अधिग्रहण रद्द कर वापिस किसानों को सौंपने की वकालत करने वाली भाजपा ने लैण्ड बिल में बदलाव समर्थन किया। सत्ता में आते ही भाजपा को यूरिया खाद ने बेचैन किया और इंद्र देवता ने किसानों पर कहर बरसाया, जबकि पात्र अध्यापक, गैस्ट टीचर, कंप्यूटर टीचरों का संघर्ष, पंजाब सरकार के सामान वेतन का मामला सुलझा नहीं था कि जाट आरक्षण रद्द होने का ठीकरा भी भाजपा सिर फोड़ दिया गया। हरियाणवी राजनीति में किसान और अध्यापक की महत्वपूर्ण भूमिका है, मगर दोनो ही सड़कों पर है। कांग्रेस के मुद्दे भाजपा ही दे रही है, क्योंकि इनैलो अपने सुप्रीमों ओम प्रकाश चौटाला और युवा कमांडर अजय चौटाला की कैद से अभी तक सकते से उभर नहीं पाई है। भाजपा के चुनाव दौरान हरियाणा के लोगों से जातीय भेदभाव समाप्त करने, कानून व्यवस्था पटरी पर लाने, बिजली सस्ती और ज्यादा, दो हजार रूपए मासिक बुढ़ापा  पैंशन देने के लुभावने वायदे किए, मगर किसी पर भी खरा नहीं उतर पाई, जिसके लिए प्रदेशवासियों के साथ साथ भाजपाईयों में नाराजगी है। भाजपाई दिग्गजों, विधायकों व सांसदों पर अफसरशाही हावी है। काम न होने के चलते उन्हें लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है।  हरियाणा की भाजपा सरकार यदि देवीलाल, बंसीलाल जैसे शक्तिशाली राजनेताओं के हश्र से सबक नहीं लेती, तो हरियाणवी राजनीति रंग बदलने में देरी नहीं लगाती। दूसरी तरफ कांग्रेस सुप्रीमों ने कांग्रेस को वंटिलेटर से निकाल कर फील्ड दे दिया है, जहां से वह सरकार विरोधी चिंगारी पर घी डालने का काम किया जा सकता है।

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