हरियाणा पुलिस कर्मचारी मानसिक रोगों की लपेट में - The Pressvarta Trust

Breaking

Saturday, March 28, 2015

हरियाणा पुलिस कर्मचारी मानसिक रोगों की लपेट में

सिरसा(प्रैसवार्ता)। भारत की स्वतंत्रता के 68 वर्ष उपरांत भी पुलिस कर्मचारी गुलाम भारत में फिरंगी पुलिस के शोषण की तरह पिस रहे है और इनके दर्द को समझने के लिए सरकारी तंत्र को न तो चिंता है  और न ही राजनेता इस ओर ध्यान दे रहे है। पुलिस विभाग में स्टॉफ की कमी का खामियाजा मौजूदा पुलिसजनों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें वर्दी पहनकर 18 से 20 घंटे ड्यूटी करनी पड़ रही है, जिसकी ऐवज में कोई ओवर टाईम भी नहीं मिलता। गली मौहल्लों, चौक व सड़कों पर तैनात पुलिस कर्मियों के लिए कोई सुविधा नहीं है और उन्हें कड़कती गर्मी व ठिठुरती ठंड तथा बारीश में भीगना पड़ता है। केवल इतना ही नहीं, वीआईपी के आगमन पर 5 से 6 घंटे तक का इंतजार करना पड़ता है। सिपाहियों को न तो समय पर खाना मिलता है, न ही नहाने-धोने व सोने के लिए पर्याप्त समय। छुट्टी के लिए भी कई-कई दिन प्रतीक्षा करनी पड़ती है। पुलिस थानों व चौकी में फरियादी के झूठ पर उच्चाधिकारियों  की डांट सुननी पड़ती है। अपनों से दूर की जिंदगी में रह रहे सिपाही अक्सर अपने परिवारिक आयोजनों व दुख सुख में शामिल भी नहीं हो पाते और न ही बूढ़े मां-बाप, पत्नी व परिवार की सही ढंग से देखभाल भी नहीं कर पाते। उन्हें दूसरों का सहारा लेना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में धीरे-धीरे वह तनाव ग्रस्त हो जाते है और उनके स्वभाव में चिड़चिड़पान आ जाता है। छोटी-छोटी बातों पर क्रोधित होना उन्हें शारीरिक व समाजिक तौर पर बेहद कमजोर कर देता है, जिसका खामियाजा उन्हें सेवानिवृत्ति उपरांत भुगतना पड़ता है, जब परिवारजन उनसे दूरी बनाए रखने पर मजबूर हो जाते है। वरिष्ठ अधिवक्ता सत्येंंद्र पुरी कहते है कि तंत्र उसी समय ठीक ढंग से काम करता है, जब उनके सभी अंग स्वस्थ हो। शरीर का एक भी कमजोर अंग पूरे तंत्र को प्रभावित करता है। परिवारजनों से दूरी व लंबी ड्यूटी से पुलिसिया तंत्र तनावग्रस्त हो जाता है और फिर हर फरियादी से दुव्र्यवहार पर उतर आता है, जिसकी शिकायतबाजीया मीडिया में सुर्खिया बनने से बदनामी होती है। पुलिसजनों को तनावग्रस्त होने से बचाने के लिउ उनका समय-समय पर मैडिकल परीक्षण तथा ड्यूटी में कटौती का होना जरूरी है, अन्यथा पुलिस कर्मचारियों में बढ़ रहे मानसिक रोगों को रोका नहीं जा सकता।

No comments:

Post a Comment

Pages