परिषद चुनाव : भाजपा और हलोपा एक साथ आ सकती है मैदान में

सिरसा(प्रैसवार्ता)। सरकार द्वारा नगर परिषद सिरसा के चुनाव घोषित नहीं किए गए है, मगर परिषद पर अपना विजयी परचम लहराने के लिए राजनीतिक दल सक्रिय हो गए है। वर्तमान में परिषद पर इनैलो का कब्जा है, मगर भविष्य में यह कब्जा टूट भी सकता है, क्योंकि इनैलो के कार्यकाल में परिषदों ने लोगों को सिर्फ विवाद और घोटालेे ही दिए है। कांग्रेस इस स्थिति में नहीं रही कि अपने  बलबूते पर प्रधानगी तक पहुंच सके। ऐसी ही स्थिति भारतीय जनता पार्टी की है। इनैलो का कब्जा तोडऩे के लिए भाजपा हलोपा से तालमेल कर सकती है, जिसके प्रयास शुरू होने की चर्चाएं है। विधानसभा चुनाव में हलोपा प्रत्याशी गोपाल कांडा दूसरे नंबर पर रहे थे। मौजूदा परिषद में भाजपा का कोई सदस्य नहीं है, जबकि हलोपा जरूर उपस्थिति दर्ज करवाए हुए है।  प्रैसवार्ता को मिली जानकारी के अनुसार भाजपा नेताओं की हलोपा नेताओं से बढ़ रही नजदीकियों से संकेत मिलता है कि परिषद चुनाव में भाजपा और हलोपा इक्ट्ठे चुनावी समर में उतरेंगे। परिषद की नई वार्डबंदी के अनुसार सिरसा शहर का वार्ड नम्बर 1, 18, 25, 26, 27, 30 और 31 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, जिसमें 25, 27 और 31 महिला वर्ग के लिए  है। इसी प्रकार वार्ड नम्बर 12 व 21 पिछड़ा वर्ग तथा 2, 4, 5, 7, 9, 11, 19 और 28 में महिलाएं ही चुनाव लड़ सकेंगी। शहर के सभी वार्डों में अपने अपने प्रत्याशी उतारने के लिए राजसी दिग्गजों ने अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए कसरत शुरू कर दी है। राजसी दिग्गज ने उम्मीदवारों की तलाश शुरू कर दी है। लोकसभा तथा हरियाणा विधानसभा चुनाव में इनैलो का प्रभावी प्रदर्शन रहा है, मगर परिषद चुनाव में ऐसी संभावनाएं दूर-दूर तक नजर नहीं आती। राज्य में राजनीतिक तस्वीर बदली हुई है, क्योंकि प्रदेश में भाजपाई शासन है और भाजपा परिषद में दस्तक देने का हरसंभव प्रयास करेगी, जिसके लिए सेंधमारी और तोडफ़ोड़ अभियान की भारी जरूरत रहेगी। भविष्य में होने वाले परिषद चुनाव के मौजूदा मानचित्र में कांग्रेस की नई शाखाएं, इनैलो को अपने साथ साथ अपनी करनी से जूझना होगा, वही हिचकौले खा रही पतंग की तरफ भाजपाई निगाहें देखी जा रही है। भाजपा को बैसाखी चाहिए, जिसके लिए हलोपा ही उसकी पहली पसंद रहेगी। चुनावी समय तक मानचित्र में जरूर बदलाव आएगा, इससे इंकार नहीं किया जा सकता। चर्चा तो यह है कि परिषद के चुनाव में कई मौजूदा तथा पूर्व पार्षद भगवे रंग में स्वयं को रंग सकते है, जिसके लिए बकायदा भाजपाई दिग्गजों से बकायदा उनकी बैठके हो चुकी है। भजपा प्रत्याशी के तौर से चुनाव लड़ चुकी सुनीता सेतिया के साथ आधा दर्जन पार्षद पहलेे ही भाजपाई ध्वज थाम चुके है, जबकि एक इनैलो पार्षद करीब आधा दर्जन पार्षदों के साथ कभी भी इनैलो से अलविदाई ले सकता है, जबकि कांग्रेसी पार्षदों में भी हृदय परिवर्तन की हलचल मची हुई है, जो कभी भी आस्था बदल सकते है।

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