फर्जी फार्मासिस्ट : नकली दवाईयां : रोगियों का जीवन खतरें में

सिरसा(प्रैसवार्ता)। पंजाब तथा राजस्थान की सीमा से सटा हरियाणा राज्य का जिला मुख्यालय स्वास्थ्य विभाग हरियाणा के भ्रष्ट तंत्र की बदौलत ड्रॅग माफिया के लिए सोने की खान बन गया है, जिस कारण गुणवत्ताहीन, सस्ती दवाएं और सैंपल वाली दवाईयों का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। ड्रग माफिया से जुड़े मौत के सौदागर ऐसी दवाओं को दवा विक्रेताओं के माध्यम से बेचकर लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे है। ''प्रैसवार्ता" को मिली जानकारी के अनुसार  अच्छी क्वालिटी की सही दवाईयां महंगी होने के कारण आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही है। एंटीवायॅटिक काफी महंंगे हो चुके है। एक ही दवा को दो अलग-अलग नामों से बनाकर अलग-अलग कंपनियां बेच रही है और इन दवाओं का मूल्य भी अलग अलग है। मरीज को दवा की गुणवत्ता का ज्ञान नहीं होता और दवा लिखने वाले डॉक्टरों को घर बैठे ही दवा निर्माताओं द्वारा कमीशन अथवा अमूल्य उपहार पहुंचा दिए जाते है। इस संदर्भ में सभी शिक्षकों को एक नजर नहींं देखा जा सकता, क्योंकि कुछ चिकित्सक ही सही दवा लिखकर ही पवित्र व्यवसाय के साथ चल रहे है, जबकि नीम-हकीम व झोलाछाप चिकित्सक ड्रग मॉफिया की चपेट में है, जो सस्ती दवाईयां लिखते है, जिस पर काफी मूल्य अंकित होता है। गुणवत्ताविहीन दवाएं दवा विक्रेताओं के माध्यम से लाईसैंस वाली दुकानों पर पहुंचा दी जाती है, जहां से यह नीम-हकीम, झोलाछाप चिकित्सकों तक पहुंचा दी जाती है, जो पैसों के लिए अपने पवित्र पेशे से अन्याय कर रहे है। प्रशासन इस ओर देखकर भी अनदेखी किए हुए है। सरकार ने ऐसे दवा विक्रेताओं पर नजर रखने के लिए जिला औषधि निरीक्षकों की नियुक्ति की हुई है, मगर उनकी नजरें ''नजरानाÓÓ पर ज्यादा रहती है। जिला सिरसा में ऐसे दवा विक्रेताओं की कमी नहीं है, जिनके पास या तो लाईसैंस नहीं है या फिर किराए के लाईसैंस पर दवाएं बेच रहे है। दवा विक्रेताओं का कारोबार, जहां फल-फूल रहा है, वहीं रोगियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

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