हजकां की तर्ज पर चल रही है हरियाणा कांग्रेस

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) की तर्ज पर चल रही हरियाणा कांग्रेस को लेकर कांग्रेसीजन उलझन में  है। हजकां में पति-पत्नी ही विधायक है और दोनों के हाथों में पार्टी की कमान है, जबकि हरियाणा में बतौर नीतू वर्मा प्रभारी हरियाणा महिला कांग्रेस अवंतिका तंवर सदस्य न होते हुए भी कांग्रेस में खुला हस्तक्षेप करके निर्णय ले रही है, जिसका ताजा उदाहरण महिला कांग्रेस की पूर्व जिला अध्यक्षा रीना बिरट की छुट्टी है। रीना बिरट नेे मीडिया में अवंतिका तंवर पर आरोपों की बौछार की है। इससे पूर्व महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष रही शिल्पा  वर्मा एडवोकेट अपना छुट्टी के लिए अवंतिका तंवर पर ठीकरा फोड़ते हुए कांग्रेस से अलविदाई ले चुकी है। अवंतिका तंवर भले ही कांग्रेस की प्राथमिक सदस्या न हो, मगर कांग्रेस प्रधान अशोक तंवर की धर्मपत्नी जरूर है। परिवारवाद का विरोध करने वाली हरियाणा कांग्रेस स्वयं परिवारवाद की चपेट में है। हरियाणा में कांग्रेस मुख्य रूप से दो घड़ों में बंटी हुई है, जिसमें से एक घड़े का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा कर रहे है।  राज्य के 15 कांग्रेसी विधायकों से 14 हुड्डा के साथ है, मगर हुड््डा विरोधी एक मात्र विधायिका हरियाणा में कांग्रेस विधायक दल की नेता है। प्रदेश के 80 प्रतिशत से ज्यादा कांग्रेसी दिग्गज तथा समर्थक हुड्डा के साथ है, मगर प्रधानगी अशोक तंवर संभाले हुए है, जिनका हुड्डा से 36 का आंकड़ा जग जाहिर है। पार्टी अशोक तंवर की धर्मपत्नी अवंतिका पर जिस तरह के आरोपों लगे है, उससे स्पष्ट  होता है कि तंवर कांग्रेस को पति-पत्नी के बीच रखना चाहते है, जिस प्रकार हजकां में है और कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व भी मां-बेटे के इर्द-गिर्द घूम रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा अपने सांसद पुत्र दीपेंद्र हुड्डा को राजनीति में आगे बढ़ाकर कांग्रेस की परिवारवाद परंपरा को अमलीजामा पहनाने के लिए सक्र्रिय है। कांग्रेस के इन दिग्गजों के 36 के आंकड़े से कांग्रेसीजन पिस रहा है, क्योंकि जिसका गुणगान किया, उसे छोड़कर दूसरे ने भौहें तान ली, जिसका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ रहा है। वैसे हरियाणा कांग्रेस का आपसी कलह कोई नया मामला नहीं है, क्योंकि हरियाणवी कांग्रेस और कलह का पुराना रिश्ता है। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. भजनलाल ने भी कलह के चलते हजकां का गठन किया था, क्योंकि कांग्रेस आलाकमान ेने बहुमत होते हुए भजनलाल की जगह हुड्डा को मुख्यमंत्री बना दिया था। हुड्डा ने अपने कार्यकाल में अपने राजनीतिक विरोधियों को, जो राजनीतिक घाव दिए, अभी तक हरे है। अपने एक दशक के कार्यकाल में हुड्डा ने अपने समर्थकों का एक मजबूत नेटवर्क बना लिया है, जो एक क्षेत्रीय दल के गठन के लिए काफी कहा जा सकता है। पार्टी प्रधान अशोक तंवर की दखल अंदाजी और उस पर कार्रवाई दर्शाती है कि हरियाणा कांग्रेस हजकां की तर्ज पर चल रही है।

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