हरियाणा, जहां किसानों के जख्मों पर नमक छिड़ककर सेंकी जा रही है राजनीतिक रोटियां

सिरसा(प्रैसवार्ता)। मौसम बारिश, ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के जख्मों पर राजनीतिक दलों का रोटियां सेंकने के खेल ने हरियाणवी किसानों का आईना दिखा दिया है कि वह उनकी समस्या के प्रति कितने गंभीर है। हरियाणा में पिछले 9 दिन में 9 किसान आत्महत्या या सदमें की बदौलत अपनी जीवन लीला समाप्त कर चुके है। किसानों के मुद्दे को लेकर प्रमुख विपक्षी दल इनैलो, कांग्रेस तथा सत्तारूढ़ भाजपा की सियासी जंग तेज हो गई है। भूमि अधिग्रहण बिल पर किसानों का विरोध झेल रही भाजपा ने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राहत देने का काम शुरू कर दिया है, मगर इसे ना काफी बताकर  इस मुद्दे को हवा देने लगा है। कांग्रेसी न तो बजट के दूसरे हिस्से से एक दिन पूर्व 19 अप्रैल को दिल्ली में कांग्रेस की महारैली का ऐलान कर दिया है, जबकि इनैलो अभी किसी बड़े कार्यक्रम की घोषणा से दूरी बनाए हुए है। स्वयं कों कांग्रेस हितैषी दर्शाने के लिए इनैलो तथा कांग्रेस दोनो ने डफली बजाते हुए मुआवजे और बोनस की मांग उठाकर सरकार को घेरने के प्रयास शुरू कर दिए है, तो दूसरी तरफ सरकार भी बचाव में आ गई है और अपनी साख बचाने में जुट गई है। सरकार द्वारा बार-बार स्पैशल गिरदावरी की तिथि को बढ़ाया जा रहा है। किसान महारैली में भूमि अधिग्रहण के विरोध के साथ साथ मुआवजा और बोनस की मांग भी उठाई जाएगी। बेमौसमी बारिश के  चलते किसानों पर दोहरी मार पड़ेगी, क्योंकि खेत में खड़ी फसल प्रभावित होगी, तो मंडी में पड़ी फसल को भी क्षति होगी।
किसान महारैली को लेकर हरियाणा में कांग्रेस और हुड्डा कांग्रेस को एक परीक्षा से गुजरना होगा, जिसके लिए दोनो को अपनी अपनी शक्ति दर्शानी होगी।  हरियाणा में कांग्रेस के साथ साथ एक ओर कांग्रेसी संगठन चल रहा है, जिसे राज्य में हुड्डा कांग्रेस के नाम से जाना जाता है। किसानों को वोट बैंक के नजरिए से देख रहे राजनीतिक दल उनकी समस्याओं के समाधान की बजाए अपनी किसान हितैषी छवि बनाने में जोर लगा रहे है, जबकि किसान अपने जख्मों पर नमक छिड़क रहे इन राजनीतिक दलों की तरफ टिकटिकी लगाकर देख रहे है।

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