आम आदमी पार्टी लीडरशिप की तलाश में - The Pressvarta Trust

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Monday, April 13, 2015

आम आदमी पार्टी लीडरशिप की तलाश में

बठिण्डा(प्रैसवार्ता)। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत लेकर सत्ता पर काबिज हुई आम आदमी पार्टी(आप) के बीच उपज रहे आपसी कलह के चलते अन्य राज्यों में सियासी प्लेटफॉर्म ढूंढने के लिए आम आदमी पार्टी (आप) ने तलाश शुरू कर दी है। वर्तमान में आम आदमी पार्टी के  लोकसभा में 4 सांसद  है और चारों ही पंजाब राज्य से है। पंजाब विधानसभा चुनाव में भी 2017 में होने वाले है। दिल्ली के ज्यादातर मतदाताओं की रिश्तेदारियां इत्यादि भी पंजाब में है, क्योंकि पंजाब राज्य से संबंधित लोगों की दिल्ली में भारी संख्या कही जा सकती है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में हरियाणवी विधायकों का आंकड़ा ज्यादा है और आप के संयोजक अरविन्द केजरीवाल भी हरियाणवी है, मगर हरियाणा में आप की बगावती चिंगारी के चलते आप ने पंजाब की तरफ रूझान बनाया है। दिल्ली, हरियाणा की तरह पंजाब में भी आप अंदरूणी कलह की चपेट में है, जिसकी पुष्टि आप के संयोजक सुच्चा सिंह छोटेपुर और डॉ. दलजीत सिंह चीमा की खींचतान करती है। योगेंद्र यादव के साथ संबंध रखने वाले भी स्वयं को किसी निर्णय तक न पहुंचने की स्थिति में है। लोकसभा में पंजाब की आप दस्तक उपरांत आप का पंजाब में कोई संगठनात्मक ढांचा मजबूत न करने का कोई ठोस कदम उठाया गया, मगर दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप को मिले भारी बहुमत  से पंजाब में अकाली दल और भाजपा में खट्टास तथा कांग्रेस के आपसी कलह से आप को उम्मीद जगी है कि वह 2017 को होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में विजयी परचम लहरा सकती है। इसी सोच को लेकर आप ने पंजाब में लीडरशिप की तलाश शुरू कर दी है, जिसके लिए आप के शीर्ष नेतृत्व ने सक्रियता बढ़ा दी है। प्रैसवार्ता को मिली जानकारी के अनुसार मौजूदा संयोजक सुच्चा सिंह छोटेपुर की जगह हरविंद्र सिंह फूलका एडवोकेट को जिम्मेदारी दी जा सकती है, जो लोकसभा के लुधियाना संसदीय क्षेत्र से भी चुनाव लड़ चुके है तथा 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों में पीडि़तों को न्याय दिलवाने के संघर्ष करके पंजाब में विशेष पहचान रखते है। 
फूलकां को अरविन्द केजरीवाल का करीबी माना जाता है। फूलकां के पक्ष में यह भी कहा जाता है कि वह सिखों के एक प्रसिद्ध फूलकिया घराने से संबंध रखते है। इस घराने से पटियाला, नामा, जींद इत्यादि रियासतों के वारिस पैदा हुए है। आप की इस योजना से अकाली दल सतर्क हो गया है और उसने भाजपाई खट्टास को दूर करने तथा आप के आपसी कलह को हवा देनी शुरू कर दी है।

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