डूमरखां के तेवरों से भाजपाई सकते में, खट्टर सरकार पर साधे कई निशाने

सिरसा(प्रैसवार्ता)। पिछले चार दशक से कांग्रेस में रहकर ट्रेजिडी किंग के नाम से विख्यात वीरेंद्र डूमरखां ने कांग्रेस से अलविदाई लेकर भाजपाई ध्वज उठाकर मोदी सरकार में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री का पद हथिया लिया है, मगर उनके मुख्यमंत्री बनने की चाहत ज्यों की त्यों है, इसलिए वह मुख्यमंत्री देखते ही तेवर बदल लेते है। पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा से छत्तीस का आंकड़ा रखने वाले डूमरखां ने भाजपाई मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को भी नहीं बक्शा और खट्टर की मौजूदगी में उन पर निशान साधते हुए ऐसे शब्द बाण दागे, जिसने चर्चा चला दी कि खट्टर सरकार से जनता के साथ साथ अपने भी खफा है, जो अंदर ही अंदर घुट रहे है। डूमरखां से खट्टर को एक पॉवरफुल बताते हुए कहा कि मंत्री, विधायकों की कोई सुनवाई और काम नहीं होते, तो भाजपाई दिग्गजों पर क्या गुजर रही होगी, इसका शायद खट्टर को अंदाजा नहीं है।
डूमरखां ने खट्टर सरकार द्वारा युवाओं को मैरिट के आधार पर नौकरियां देने के दावे पर नाराजगी व्यक्त करते हुए मशवरा दिया है कि एक परिवार से एक जरूरतमंद को उसकी योग्यतानुसार नौकरी दी जानी चाहिए। डूमरखां के इस मशविरे से भाजपाई सकते में आ गए है और प्रदेश में एक नई बहस ने जन्म ले लिया है। सरकार के कई सांसद, मंत्री व विधायक तथा भाजपाई दिग्गज, जो स्वयं को पीडि़त महसूस करते है, पर्दे के पीछे रहकर डूमरखां का समर्थन करने लगे है। ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के खिलाफ भाजपाई दिग्गजों का एक गुट लामबंद हो रहा है, जो पार्टी प्रभारी को अपना दर्द जता चुके है। डूमरखां की भाजपा सरकार की मौजूदा कार्यप्रणाली पर टिप्पणी पर खट्टर ने भले ही कोई तव्वजों नहीं दी, मगर वह समझ जरूर गए कि अंदरूणी तौर पर भाजपाई दिग्गज उनसे प्र्रसन्न नहीं है और वह कभी भी उनके लिए परेशानी पैदा कर सकते है।

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