जनता परिवार : साईकिल पर कर सकता है सवारी

सिरसा(प्रैसवार्ता)। देश की आजादी से लेकर अब तक देश में अनेक पार्टियों के जन्म लेने और प्रभात के तारे की तरह छिपता देखा है। वहीं पुरानी डुगडुगी अब बजने जा रही है, जिसमें आधा दर्जन राजनीतिक दल अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाए रखने के लिए क्षेत्रीय हितों को राष्ट्र हित पर कुर्बान करने जा रहा है। भाजपाई शासन के विरोध में छक्का मारने के लिए एकत्रित हुए जेडी(यू) के प्रधान शरद यादव, समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव, इनैलो सुप्रीमों ओम प्रकाश चौटाला, जनता दल (एस) के एचडी देवगौडा पूर्व प्रधानमंत्री, जनता दल (यू) के नितिश कुमार और समता पार्टी के कमल मोरारका ने विलय की घोषणा तो कर दी है, मगर नई पार्टी का नाम और पार्टी चिन्ह का ऐलान बाकी है। प्रैसवार्ता को मिली जानकारी के अनुसार इस नई पार्टी का नाम समाजवादी जनता पार्टी और चुनाव चिन्ह साईकिल पर सहमति प्रकट कर चुके है। जनता दल में शामिल होने वाले राजसी दिग्गज अपने-अपने राज्यों में अच्छा असर रखते है और सरकार भी चला चुके है। लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव परिणामों ने समाजवादी विचारधारा को ढिढ़ोरा पीटने वाले क्षेत्रीय दलों के राजनीतिक अस्तित्व पर खतरे के बादल की हलचल के चलते अपना-अपना अस्तित्व बरकरार रहने के लिए एक मंच पर आना पड़ा है। हरियाणा में इनैलो की फौज को नाम व चुनाव चिन्ह बदलने से कुछ परेशानी जरूर होगी, हालांकि इससे पूर्व इनैलो के सैनिकों ने कई पार्टियों और कई चुनाव चिन्हों पर चुनाव लड़े है। इनैलो समाजवादी जनता पार्टी (सजपा) के बैनर तले भी चुनावी समर में कूद चुकी है। भारत का राजनीतिक मानचित्र दर्शाता है कि राजसी दिग्गजों को सत्ता सुख भोगने को लेकर हृदय परिवर्तन होना सामान्य है। वर्तमान में देश की नजरें एक बार फिर पुराने नाटक पर टिक गई है, जिसकी कमान जनता द्वारा सत्ता से दूर किए गए राजसी दिग्गजों के हाथों में है। इस छक्के (जनता परिवार) में मात्र 15 लोकसभा के सदस्य है और राज्यसभा में 30। पार्टी नेतृत्व का ताना-बाना भविष्ष्य में उलझ भी सकता है और जनता दल देश को वह तस्वीर नहीं दिखा पाएगा, जैसी कि राष्ट्रीय दल की होनी चाहिए। इस विलय पर सही टिप्पणी तो बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम उपरांत की जा सकेगी। यदि जनता परिवार का यह प्रयास सफल रहता है, तो इनैलो की फौज को चश्मा उताकर साईकिल की सवारी करनी पड़ सकती है।

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