अच्छे दिनों को कहीं लग न जाए बैक गेयर

नई दिल्ली(प्रैसवार्ता)। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार से इतनी जल्दी लोगों का मोह भंग हो जाएगा, उम्मीद नहीं थी, मगर सरकार के भीतर के अंतविरोध उसके प्रदर्शन को बैक गेयर की तरफ ले जा रहा है। मंत्रियों और अफसरशाही के तालमेल न होने के चलते महत्वपूर्ण योजनाएं सिरे नहीं चढ़ रही है, बल्कि कई योजनाओं पर तो संकट के बादल मंडराने लगे है। ज्यादातर सरकारी योजनाओं की फाइलों पर ब्रेक लग गया है, जिससे संकेत मिलता है कि अच्छे दिन ब्रेक गेयर की तरफ मुड़़ रहे है। प्रैसवार्ता को मिली जानकारी के अनुसार ताजा विवाद गंगा पर प्रस्तावित बिजली योजना को लेकर है। पर्यावरण मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट में हल्फनामा दाखिल कर इन परियोजनाओं पर अपनी सहमति जता चुका है, जबकि जल संसाधन मंत्रालय इस पर कड़ी आपत्ति रखता है। दोनो मंत्रालय प्रधानमंत्री के मशवरे को बाईपास करके आपसी पत्र व्यवहार में ही उलझ कर रह गए है। सूत्रों के मुताबिक जल संसाधन, नदी विकास और गंगा सरंक्षण मंत्री उमा भारती ने पर्यावरण मंत्री प्रकाश जाबेडकर को जल्दबाजी में इस प्रकरण को लेकर कोई कदम उठाने की सलाह भी दी है। नमामि गंगे योजना को लेकर जल संसाधन मंत्रालय गंगा पर प्रस्तावित चौबीस जल विद्युत परियोजनाओं के लिए बांध के निर्माण के पक्ष में नहीं है, जिस कारण यह योजना धरातल पर नहीं उतर पाई है। नौकरशाही इस कद्र हावी है कि जुलाई 2014 उपरांत से अब तक 804 आवेदकों में से पर्यावरण मंत्रालय ने मात्र 59 प्रस्तावों पर सहमति दर्शाई है। सरकार की इस योजना का कि प्रतिदिन सड़क बनाने  का 30 किलोमीटर का लक्ष्य प्राप्त होना, हवा-हवाई हो गया है, क्योंकि अक्टूबर 2014 उपरांत एक भी नई सड़क परियोजना की शुरूआत नहंी हुई है। देश में 25 फरवरी 2015 तक बुनियादी क्षेत्र  की लगभग तीन सौ परियोजनाएं स्वीकृति की इंतजार में है, जिन पर 18 लाख करोड़ का निवेश प्र्रस्तावित है। इसके पीछे भूमि अधिग्रहण विधेयक की दलील दी जा रही है, जिसे लेकर उद्योग जगत उलझन में है। इसी प्रकार वाणिज्य तथा वित्त मंत्रालय के बीच निर्यातकों को दी जाने वाली रियायतो पर सहमति बन नहीं पा रही, जिस कारण देश का निर्यात तेजी से घट रहा है।

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