गुलाबी पगडी, तिरंगी टोपी के बीच फंसा कांग्रेसी पटका

सिरसा(प्रैसवार्ता)। आपसी कलह से जूझ रही हरियाणा कांग्रेस के दिग्गजों ने गुलाबी पगडी, तिरंगी टोपी के बीच कांग्रेसी पटके को फंसा दिया है। हरियाणवी राजनीति में गुलाबी पगड़ी, तिरंगी टोपी से पहले कांग्रेसी जनसभाओं व कार्यक्रमों में कांग्रेस चुनाव चिन्ह वाले पटके ही कांग्रेस समर्थक पहनते थे, मगर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा तथा मौजूदा पार्टी प्रधान अशोक तंवर के छत्तीस के आंकड़े के चलते कांग्रेसी पटका छिक्के की शोभा बनकर रह गया है, जबकि कई लोगों ने कांग्रेसी पटके को साफ सफाई करने वाला पोचा बना लिया है। हुड्डा ने एक दशक के कार्यकाल में अपने समर्थकों की एक लंबी फौज तैयार करके उन्हें गुलाबी पगड़ी पहनाकर अपनी विशेष पहचान बना ली है। हरियाणा में गुलाबी पगड़ी धारक को हुड्डा कांग्रेसी कहा जाता है। दिल्ली रैली में अपना शक्ति प्रदर्शन करने के लिए तंवर ने तिरंगी टोपी पहनने का राग अलाप शुरू कर दिया, क्योंकि उन्हें भय था कि गुलाबी पगडी उस पर भारी पड़ेगी। तिरंगी टोपी का राग इसलिए अलापा गया कि गुलाबी पगड़ी तो हरियाणा से ही होगी, जबकि तिरंगी टोपी देशभर के कांग्रेसीजन औढेंगे। जिसका फायदा उठाकर तंवर अपना भीड़ का आंकड़ा बढ़ाकर पेश कर सकेंगे। हुड््डा-तंवर की जंग में कांग्रेसी दिग्गजों द्वारा कांग्रेसी पटके को, तो पटका दिया है,मगर गुलाबी पगड़ी या तिरंगी टोपी से भी दूरी बनाई हुई है, जो कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नहीं कही जा सकता।

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