हरियाणा में गुलाबी पगड़ी की दस्तक : हरी पगड़ी पर प्रश्र चिन्ह

सिरसा(प्रैसवार्ता)। इनैलो सुप्रीमों ओम प्रकाश चौटाला और अजय चौटाला को जेबीटी शिक्षक घोटाले में हुई दस दस वर्ष की कैद से सकते में आई इनैलो उभरने का नाम नहीं ले रही है। लोकसभा चुनाव में फीके प्रदर्शन तथा विधानसभा चुनाव में बगावत की आंधी की चपेट में आई इनैलो के अब जनता परिवार में विलय की घोषणा ने इनैलो कार्यकर्ताओं को असमंजस की स्थिति में ला दिया है।  निरंतर हिचकौले खा रही इनैलो के जनता परिवार में विलय को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। क्यास लगाया जाने लगा है कि इनैलो को अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए जनता परिवार रूपी मंच की तलाश थी। हरियाणा में पगड़ी का बहुुत सम्मान है और इनैलो की फौज हरी पगड़ी को बड़े चाव से पहनती है, मगर अब जनता परिवार में कौन सी पगड़ी पहनी जाएगी, इसकी अभी तक कोई जानकारी किसी को नहीं, क्योंकि जनता परिवार ने पार्टी का नाम व निशान तय नहीं किया है। इनैलो सैनिक पिछले समय में कई पार्टियों के बैनर तले तथा कई चुनाव चिन्ह को लेकर राजनीति करते रहे है। हलोदरा, जनता पार्टी, सजपा, दमकिया जैसे राजनीतिक दल नामों पर चुनावी समर में कूदने वाली इनैलो फौज पिछले 17 वर्ष से हरी पगड़ी और चश्मा गुणगान कर रही है। इनैलो के जनता परिवार में विलय से हरी पगड़ी और चश्मा पर ग्रहण लगता दिखाई देने लगा है, क्योंकि दूसरी तरफ आपसी कलह से जूझ रही कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा समर्थकों ने हरियाणवी राजनीति में गुलाबी पगड़ी उतार दी है। इनैलो 2005 से सत्ता से दूर है और निरंतर उसका जनाधार भी खिसक रहा है। इनैलो के कई दिग्गजों ने हरी पगड़ी और चश्मा उतार दिया है। पिछले विधानसभा चुनाव में इनैलो के पास 90 सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा के 32 विधायक थे, जो पिछले चुनाव में कम होकर 20 रह गए है। हिचकौले खा रही इनैलो के अस्तित्व पर गहराते खतरे के बादल को भांपते हुए इनैलो आलाकमान ने जनता परिवार की शरण ली है, मगर इनैलो वर्कर इसे लेकर दुविधा में है, क्योंकि उन्हें नई पार्टी और नए चुनाव चिन्ह को पुन: हरियाणवी मतदाताओं तक पहुंचाना होगा, जो एक चुनौती से कम नहीं आंका जा सकता। जनता परिवार का चुनाव चिन्ह क्या होगा, पार्टी का नाम क्या होगा, इस प्रश्र का उत्तर फिलहाल प्रश्र के गर्भ में है। 

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