कैप्टन अमरेंद्र की अनदेखी कांग्रेस हाईकमान पर पड़ सकती है भारी - The Pressvarta Trust

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Wednesday, April 15, 2015

कैप्टन अमरेंद्र की अनदेखी कांग्रेस हाईकमान पर पड़ सकती है भारी

लुधियाना(प्रैसवार्ता)। कांग्रेस की 19 अप्रैल को दिल्ली रैली उपरांत पंजाब और हरियाणा के संगठन में एक बड़े बदलाव की संभावनाएं नजर आने लगी है, जिसे भांपते हुए कांग्रेसी सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री पंजाब कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने अपने समर्थकों से विचार विमर्श शुरू कर दिया है, ताकि वह अपने राजनीतिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए कोई रणनीति तैयार कर सके। कैप्टन सिंह ने राहुल गांधी को पार्टी का अध्यक्ष न बनाने का मशवरा दिया है, जिसे लेकर छत्तीस का आंकड़ा रखे हुए पार्टी प्रधान प्रताप सिंह बाजवा ने कैप्टन के विरूद्ध मोर्चा खोलते हुए उन पर पार्टी कमजोर करने का आरोप लगाकर उन्हें पार्टी से निकालने की मांग कर डाली है, जिस पर कैप्टन समर्थक आग बबूला हो उठे है और उन्होंने बाजवा की प्रधानगी मुक्त करने की मुहिम चलाकर कांग्रेस हाईकमान पर दवाब बनाना शुरू कर दिया है। पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब सुप्रीमों मनप्रीत बादल पर भी कांग्रेस द्वारा डोरे डाले जा रहे है, जबकि कांग्रेस से अलग होने वाले दिग्गजों की घर वापिसी के प्रयास भी कांग्रेस द्वारा शुरू किए जा चुके है। प्रैसवार्ता को मिली जानकारी के अनुसार पंजाब के कांग्रेसी कलह को देखते हुए पार्टी का नेतृत्व बदला जाना यकीनी है। यदि ऐसा होता है, तो लुधियाना के सांसद रवनीत सिंह बिट्टू की लॉटरी खुल सकती है, जोकि जट सिख समुदाय से संबंधित होने के साथ साथ पूर्व मुख्यमंत्री पंजाब स्व. बेअंत सिंह के पौत्र है तथा  दूसरी बार लुधियाना के सांसद बने है। बिट्टू न सिर्फ युवा चेहरा है, बल्कि कांग्रेसी विधायकों का एक बड़ा ग्रूप उनकी प्रधानगी की वकालत कर रहा है। कांग्रेस हाईकमान कैप्टन अमरेंद्र सिंह द्वारा पंजाब संबंधी लिए जाने वाले निर्णयों में उत्पन्न की जा रही रूकावट को लेकर गंभीर है, क्योंकि यदि कैप्टन का हृदय परिवर्तन हो जाता है, तो हिचकौले खा रही पंजाब कांग्रेस की नैया डूब सकती है, इसलिए कांग्रेस कैप्टन सिंह को खोना  नहीं चाहती। कैप्टन सिंह को कांग्रेस राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण जिम्मेवारी सौंपने के पक्ष में भी है, मगर कैप्टन सिंह प्रदेश की राजनीति से दूर नहीं जाना चाहते। वर्तमान में कैप्टन सिंह का पंजाब के कांग्रेसीजनों तथा लोगों में अच्छा प्रभाव है, क्योंकि कैप्टन सिंह ने पंजाब के यानी मुद्दे पर वकालत करके जहां मुख्यमंत्री बादल को फंसा दिया है, वहीं किसानों की हमदर्दी बटोर ली है। भ्रष्टाचार के मामले में पीपीएससी के चेयरमैन रवि सिधु के पक्ष में देखा जाने लगा है। कांग्रेस हाईकमान समझता है कि कैप्टन सिंह की अनदेखी से पंजाब कांग्रेस की स्थिति यूपी, बिहार से भी बदत्तर हो सकती है। इसलिए कैप्टन सिंह को लेकर गंभीर चिंतन में है।

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