दिल्ली पुलिस की नाक के नीचे - लव, सैक्स और धोखा... ... ...

प्यार करने वाले कभी डरते नहीं, जो डरते हैं वो प्यार करते नहीं... ... ...!!! बर्गर, डोसा, पिज्ज़ा, समोसे, चाऊमीन, गोल-गप्पे, टिक्की, भल्ले, पापड़ी, हर तरीके की मिठाइयां और युवा जोड़ों की पसंद की हर प्रकार की हॉट एवम् कोल्डड्रिंक।  सबकुछ तो मिलता है ऊपर दिखाई गई पूर्वी दिल्ली की इन काले शीषे लगी दुकानों में, तनिक आ कर तो देखिये... ... ...  
म्म्म्म्म ना, लेकिन सावधान... ... ... अगर आप अकेले ही इन चीज़ों का मजा लेने के लिये उतावले हो रहे हैं, तो इस गलतफहमी में मत रहियेगा कि यह सब आपको अकेले पहुंचने पर 
भी मिल जायेगा।  इन सब चीजों का मजा आपको तभी इन चमकते काले-रंगीन शीशों के पीछे मिल पायेगा जब आशिक अपनी माशुका या माशुका अपने आशिक के साथ प्यार का इज़हार करना चाहेगी - बोले तो ''एंट्री जोडे से"।  
अर्रेर्रेर्रे... ... ... ये क्या ??? अन्दर का नजारा तो कुछ बदला-बदला सा नजर आ रहा है।  आये थे फास्ट फूड, साउथ इंडियन और मिठाइयों के मजे के साथ दो प्यार भरी बातें करने लेकिन यहां तो सोने पर सुहागा हो गया।  यहां तो इन सब चीजों के नाम पर सिर्फ और सिर्फ एक टूटा-फूटा सा बैन्च, सोफा या गद्दा लगी मेज है और उस पर चढ़कर एक-दूजे से मिलने की एक घंटे की कीमत मात्र 250-500 रूपये।  अब समझदार आप खुद हैं कि आपको इस प्यार भरी महफिल में कितनी देर ठहरना है और किन-किन हदों को पार करना है...???  लेकिन डरें नहीं, यहां आपको किसी पुलिस महकमे के अधिकारी या हवलदार का खौफ तो सतायेगा ही नहीं बल्कि आपके घरवाले तो यहां सूंघने के बाद भी नहीं पहुंच सकते क्योंकि उनको तो बाहर से ही ठेंगा दिखा कर रफा-दफा कर दिया जायेगा।  मतलब पार्क में बैठकर जिल्लत भरी पप्पी करने से अच्छा यहां 250-500 रूपये में आप पूर्ण रूप से एक-दूसरे के हो सकते हैं वो भी बिना किसी भय और चिंता के।  तो अब दिल खोलकर लीजिये मजे और आपकी पहरेदारी को तैयार है खाकी वर्दी पहने दिल्ली पुलिस के जवान और उस जगह के पहरेदार अर्थात आपके और दिल्ली पुलिस के बीच का रोल निभाने वाले ''दलाल"।  
ऊपर बयान किया गया नजारा दिल्ली में आपको हर खास और आम जगह देखने को मिल जायेगा, लेकिन इस बार हम आपको बतायेंगे पूर्वी दिल्ली की खाकी की नाक के नीचे हो रहे इस गोरख धन्धे ''लव, सैक्स और धोखेÓÓ के बारे में।  
थाना करावल नगर, भजनपुरा, विश्वास नगर सरीखे पूर्वी दिल्ली के जाने-माने नामों के अन्तर्गत आने वाले कई इलाकों में इस तरह के दृश्यों की गवाह बनी हमारी गुप्त टीम।  चित्रों में दर्शाए गये सभी रेस्टोरेन्ट्स में युवाओं को खुली छूट के साथ एन्ट्री दी जाती है, बशर्ते उनके पास प्रति घंटे की दर से चुकाने के लिये एकमुष्त रकम होनी चाहियें।  फिर चाहे उनकी उम्र 12 साल हो या आप किसी की बीवी और किसी के पति वहां जोड़ी बनाकर पहुंचे हों।  उनकी चाह है आपसे प्रति घंटे की दर से पैसे वसूलना और आपको उसके बदले में अल्पकाल के लिये अन्धेरी जिन्दगी उपलब्ध करा देना, बिना किसी रोक-टोक के, मतलब ''फुट-टू-एैशÓÓ।  
बाहर की सूर्य देवता की रोशनी से होकर दुकान में एन्ट्री करने के तुरन्त बाद युवा जोड़े को उस घोर अन्धेरे वाले कमरे में धकेल दिया जाता है।  नया जोड़ा वहां एन्ट्री करने के बाद पहले तो थोड़ा सकपका जाता है कि यह कहां आ गये, लेकिन तुरन्त आपके पीछे बॉडीगार्ड के रूप में खड़ा वह आपका रखवाला मोबाइल टॉर्च की रोशनी से आपको एक खाली बेंच पर ले जाता है और वहां बैठने को कहता है।  आपके उस बेंच पर बैठने के तुरन्त बाद ही आपके हाथ में आपकी उस अंधेर नगरी में एन्ट्री का समय व उसपर एक कोडवर्ड लिखकर एक पर्ची थमा दी जाती है और कह दिया जाता है कि अब आराम से बैठो कोई डरने की जरूरत नहीं है।  
आप कुछ समझ पाते उससे पहले ही बाहर की रौशनी आपकी आंखों से ओझल होने लगती है और आप अब उस अंधेर नगरी के राजा बन जाते हैं।  राजा बनते ही सबसे पहले आपकी नजर पड़ती हैं वहां आप जैसे ही आपसे पहले आने वाले युवा जोड़ों पर, जो उस वक्त तक अपनी फिल्म को आधे से ज्यादा फिल्मा चुके होते हैं।  अगर आप नये हैं तो पहले तो आप थोड़े चौंक जायेंगे, कि यह क्या?  यह कहां आ गये हम, लेकिन थोड़ी ही देर में आप भी उन सभी से घुलमिल जायेंगे और फिर शुरू होगा आपका भी उन पहले वाले जोड़ों की तरह नंगा खेल और वह भी खाकी की नाक के नीचे।  फिर आप आपस में एक-दूसरे के साथ लव करें, ओपन सैक्स करें या फिर बाहर जाकर एक-दूसरे को धोखा दें, बस आपको वहां देने हैं प्रति घंटे के हिसाब से तय किया गया किराया, वो भी बिना किसी जान-पहचान के।  
अंधेरे कमरे में सैट किये हुए लगभग 8-10 सोफे और बैन्चों पर इतने ही जोड़ों के साथ यह सैक्स कारखाने लगभग सप्ताह के सातों दिन खुले रहते हैं और लाइन लगाकर इनकी रोज की कमाई होती है।  कई बार ऐसा भी नजारा देखने को मिलता है जब बाहर आये नये ग्राहक को गली में टहलकर अपना टाइम पास करने के लिये बोल दिया जाता है और वह जोड़ा जब तक अन्दर की एक सीट खाली ना हो जाये तब तक गली में टहलकर अपने मन को बहलाता है।  
कुछ समय बाद अन्दर से एक लड़की निकल कर बाहर आती है और उसके पीछे-पीछे एक लड़का भी जो कि हिसाब-किताब जांचने के बाद चुक्ता करके बाहर निकलता है और अब बुलावा आता है आपका, जी हां आपका।  आपको आवाज़ लगाकर या इशारा कर के उस अन्धेर नगरी के दलालों द्वारा बुलाया जाता है और आप अन्दर उस कमरे में बैठ चुके हैं, दोनों एक-दूसरे के गले में हाथ डाल चुके हैं और अब शुरू होता है आपका ''वन ऑवर स्टैन्ड"... ... ...!!! समझ गये ना आप... ... ...??? अन्धेरे के मालिक आप और आपको देखने वाली उस अन्धेरे में सिर्फ दो आंखें, वो भी उसकी जिसने आपको उस अन्धेर नगरी में एन्ट्री दी और किसी से ना डरने की सलाह भी।  आप एक बार तो उससे शर्माते हैं, लेकिन फिर बाद में उसी के सामने आपस में एक किस से शुरू की गई अपनी फिल्म को फैमिली प्लानिंग तक ले जाते हैं, लेकिन यह भविष्य तय करता है कि उस अन्धेर नगरी में आप फैमिली प्लानिंग अपनी कर रहे हैं या किसी दूसरे की... ... ...??? क्योंकि उस वक्त तो आप वहां के राजा होते हैं और राजा को कुछ भी करने का अधिकार होता है।  
उस अन्धेर नगरी में लगभग भरी हुई हर बैन्च और सोफे से युवाओं के आपस में सम्बन्ध बनाने की आवाज ही आवाज आती है और एक-दूसरे को सिर्फ आंशिक रूप से देखने के बाद वो आपस में और जोश में आ जाते हैं व अपने कार्य को अंजाम देते हैं।  इस नगरी में प्रवेश के वक्त ना तो आपसे कोई पहचान पत्र देखा जाता है और ना ही आपसे आपकी उम्र पूछी जाती है।  फिर चाहे आप बालिग हों या नाबालिग।  
इस तरह की करतूतों के बारे में कुछ समय पहले जब खाकी के कुछ आला अधिकारियों को अवगत कराया गया तो उन्होंने अपना पल्ला झाड़ते हुए फिल्मी अंदाज में इन सबको खत्म करने की तो ठानी लेकिन रात ही रात में तबाह किया गया फिल्म का वो सेट अगले ही दिन फिर से बनकर तैयार हो गया और वहां नये-पुराने कलाकारों द्वारा अपना-अपना रोल फिर से आजमाया जाने लगा।  दिल्ली पुलिस, सदैव आपके साथ और आपके लिये का नारा लगाने वाली खाकी कब सुधरेगी इस बात का पूरा देश बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहा है।  कब खाकी को अपनी वर्दी की इज्जत समझ आयेगी इस बात को लेकर हर कोई चिन्तित है।  कब खाकी पहनने वाला समझेगा कि उसके तन पर जो कपड़ा है वह एक सादा कपड़ा नहीं बल्कि देश की आन-बान और शान है।  यह सब भविष्य के गर्भ में है और भविष्य के गर्भ से बाहर आने वाला कितने समय में आयेगा और वह देवता होगा या राक्षस इस साक्ष्य का हम सबको इन्तजार है।(हेमन्त कुमार शर्मा)

No comments