पंजाब-हरियाणा के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों पर कांग्रेस से अलविदाई का दवाब

सिरसा(प्रैसवार्ता)। देशभर में निरंतर अपनी राजनीतिक जमीन खो रही कांग्रेस को पंजाब तथा हरियाणा में किसी भी समय झटका लग सकता है, क्योंकि दोनो राज्यों के प्रभावी जनाधार वाले पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह तथा भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर अनेक समर्थकों द्वारा दवाब बनाया जा रहा है कि कांग्रेस शीर्ष द्वारा की जा रही अनदेखी के चलते कांग्रेस से अलविदाई लेकर अपनी अलग पार्टी बना लें। कैप्टन अमरेंद्र सिंह स्वयं सांसद है और उनके समर्थन में एक तिहाई से ज्यादा कांग्रेसी विधायकों के अतिरिक्त पूर्व सांसदों व पूर्व विधायकों की एक लंबी फौज है, वहीं हुड्डा के समर्थन में एक मात्र कांग्रेसी सांसद दीपेंद्र हुड्डा, 15 विधायकों में से 14 विधायक तथा अनेक पूर्व सांसद व विधायक है। दोनो राज्यों में कांग्रेस के पार्टी प्रधान तथा पूर्व मुख्यमंत्री का राजनीतिक कलह पूरे यौवन है और दोनो पूर्व मुख्यमंत्री अपना-अपना शक्ति प्रदर्शन करके अपनी उपस्थिति व शक्ति का अहसार कांग्रेस आलाकमान को करवा चुके है। कांग्रेस के युवराज जनाधार, जनशक्ति की बजाए ''जी-हजूरियो" को तव्वजों देकर ऐसी स्थिति बना रहे है, कि पंजाब तथा हरियाणा में कांग्रेस किसी भी चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज न करवा सके। पंजाब के धूरी उपचुनाव तथा दिल्ली रैली की हुटिंग पर कांग्रेस आलाकमान के नजरिए से दोनो पूर्व मुख्यमंत्रियों के समर्थक सकते में है और कांग्रेस से अलविदाई का दवाब बनाए हुए है। दोनो पूर्व मुख्यमंत्रियों की अपने-अपने राज्यों में मजबूत पकड़ व जनाधार है। कांग्रेस आलाकमान यदि समय रहते हुए अपनी सोच और रवैये में बदलाव न लाया, तो दोनो राज्यों के मानचित्रों में धुंधली-धुंधली नजर आ सकती है, जिसे कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता।

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