गुलाबी पगड़ी ने बढ़़ाई तंवर की मुश्किलें : सकते में इनैलो

सिरसा(प्रैसवार्ता)। रामलीला मैदान दिल्ली में कांग्रेस की रैली में मौजूद भारी संख्या की चमकती गुलाबी पगडिय़ों ने पार्टी के मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर की बेचैनी बढ़ा दी है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किसानों की भारी भीड़ जुटाकर इनैलो को सकते में ला दिया है। दिल्ली रैली में गुलाबी पगड़ी वालों का बोलबाला दर्शाता है कि हरियाणा में किसानों, मजदूरों व प्रदेशवासियों पर हुड्डा की पकड़ आज भी मजबूत है। ओलावृष्टि और बेमौसमी बारिश द्वारा किसानों को दिए गए जख्मों पर मरहम लगाने आई कांग्रेस सुप्रीमों सोनिया गांधी ने भी हुड्डा की प्रशंसा की थी। गुलाबी पगडी वालों की तंवर के भाषण पर हुल्लडबाजी संकेत दे गई है कि कांग्रेस को हरियाणा में अस्तित्व बनाए रखने के लिए कांग्रेस कलह रतन अशोक तंवर को उसी पैराशूट से वापिस बुलाना होगा, जिसके माध्यम से उनकी हरियाणवी राजनीति में दस्तक हुई थी। तंवर के प्रदेशाध्यक्ष की कमान संभालने उपरांत कांग्रेस कलह में भारी इजाफा हुआ है, जिसकी पुष्टि तंवर द्वारा प्रदेशभर में की गई कांग्रेसी बैठकें करती है, जो हंगामे के साथ समाप्त हुई है। गुलाबी पगड़ी ने कांग्रेस आलाकमान को आईना दिखा दिया है कि हरियाणा का जादू बरकरार है और हरियाणा कांग्रेस को मजबूती वह ही दे सकते है। ढोल, नगाड़ों के साथ गुलाबी पगड़ी वालों की फौज ने कांग्रेस आलाकमान को भी हरियाणवी कांग्रेस की तस्वीर दिखा दी है। गैर जाट बनाम जाट की राजनीति को एक ही सूत्र में पिरोने में भूपेंद्र हुड्डा पूर्णयता सक्षम है। चर्चा है कि तंवर द्वारा किसानों रैली से दो दिन पूर्व राहुल गांधी से किसानों की मुलाकात करवाकर अपनी स्थिति की मजबूती दर्शाने की कोशिश की थी, जो गुलाबी पगड़ी ने पोल-खोल कर पूरी कर दी। अपने को मिले इस राजनीतिक झटके ने बेचैन तंवर ने संगठन में पदाधिकारियों की नियुक्ति जल्द करने की योजना बनाई है, ताकि ज्यादा से ज्यादा चहेतों को संगठन में स्थान दिया जा सके। गुलाबी पगड़ी के समांतर टोपी से लेकर तंवर को पछतावा हो रहा है, क्योंकि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि हुड्डी की फौज उनकी नींद हराम कर देगी और कांग्रेस आलाकमान के समक्ष सच्चाई आ जाएगी। यहीं सच्चाई उनकी प्रधानगी पर ग्रहण लगा सकती है, क्योंकि गुलाबी पगड़ी व टोपी की दौड़ में वह बुरी तरह से पिछड़ गए है। किसान रैली से किसानों को फायदा होगा या नहीं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, परंतु हुड्डा की गुलाबी पगड़ी ने कांग्रेस आलाकमान को अहसास करा दिया है कि तंवर के रहते हुए कांग्रेस में कलह कम होने की बजाए तेजी से बढ़ेगा। इसलिए तंवर को प्रधानगी वापिस लेकर हुड्डा समर्थक को सौंपी जाए, जिसकी प्रदेश कांग्रेसीजन भी उम्मीद करते हो। राजनीतिक पंडितों की सोच है कि गुलाबी पगड़ी की दिल्ली रैली में धाक हुड्डा को एक बड़े किसान नेता के रूप में उतारने के लिए कांग्रेस को मजबूर कर सकती है, जिसका फायदा कांग्रेस राजस्थान, हरियाणा, यूपी के पश्चिमी क्षेत्र से भी उठा सकती है। हरियाणवी राजनीति में चर्चा है कि गुलाबी पगड़ी की चौधर से हुड्डा का राजनीतिक कद बढ़ा है, जो छत्तीस के आंकड़े वाले अशोक तंवर पर भारी पड़ सकता है, क्योंकि कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्ष चुनाव में तंवर भी हुड्डा की राजनीतिक पटकनी की चपेट में आकर एक राजनीतिक घाव हासिल कर सकते। हरियाणवी राजनीति इसकी गवाह है कि हुड्डा द्वारा अपने विरोधियों को दिए घाव पर कोई भी मरहम असर नहीं करता।

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