अफीम तस्करी में किरकिरी झेल रही ओढां पुलिस पर 'साहब' की गाज

ओढ़ां(प्रैसवार्ता)। चंडीगढ़ नारकोटिक सैल द्वारा ओढां थाना क्षेत्र के गांव जंडवाला से भारी मात्रा में अफीम व नकदी पकडऩे के मामले में क्षेत्र में अभी तक चर्चाओं का दौर जारी है जिससे जिला पुलिस की किरकिरी हुई है वहीं ओढां पुलिस पर भी गाज गिरी है जिसमें पुलिस अधीक्षक ने ओढां थाना प्रभारी सहित दो कर्मचारियों को लाइन हाजिर किया है। दोनों ही कर्मचारियों की तुरंत प्रभाव से रात को रवानगी के आदेश जारी कर दिए गए। ओढां थाना प्रभारी की कमान अब उपनिरीक्षक धर्मबीर सिंह को सौपीं गई है। चर्चा इस बात की है कि ओढां थाना क्षेत्र के हिट लिस्ट में आते गांव जंडवाला जाटान में नशे का बेखौफ चल रहा था लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं थी या फिर पुलिस द्वारा उसे नजरअंदाज किया जा रहा था। पुलिस अधीक्षक अश्विन शैणवी ने जहां जिला की सीआइए में फेरबदल कर दी तो वहीं ओढां थाना प्रभारी वीरेंद्र गिल व बीट इंचार्ज एएसआई जगदीश बैनिवाल को लाइन हाजिर किया है। गौरतलब है कि एसपी मितेश जैन ने युवा सबइंस्पैक्टर वीरेंद्र गिल को ओढां थाना की कमान सौंपी ताकि तस्करी पर अंकुश लगे लेकिन नशीले पदार्थों की तस्करी कम होने की बजाय और बढ़ गई।
चर्चाओं से पुराना नाता है :
देखा जाए तो ओढां पुलिस का तस्करी पर ढील बरतने का पुराना नाता रहा है। जुलाई 2014 में अफीम तस्करी के मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में तत्कालीन एसपी मितेश जैन ने ओढां थाना प्रभारी अमरनाथ, एसआइ कश्मीरी लाल, मुंशी जगपाल सिंह, कांस्टेबल राजेश कुमार व इएसआई अवतार सिंह सहित 5 पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर करते हुए सस्पैंड कर दिया था। तो वहीं थाना की बगल में स्थित खोखे से लंबे समय से हो रही मैडिकल नशे व चुरापोस्त की बिक्री को स्थानीय पुलिस की बजाय सीआइए द्वारा पकड़ा गया था जिसमें तत्कालीन एसए दलबीर सिंह लाइन हाजिर व थाना प्रभारी वीरेंद्र कुमार को कड़ी फटकार लगी थी। फिर भी ओढां पुलिस ने इससे सबक नहीं लिया और गांव ख्योवाली में एक चुरापोस्त मामले में मुख्य आरोपी को पकडऩे की बजाय सारा दोष वाहन चालक पर डाला गया तथा लोगों द्वारा धरना प्रदर्शन करने के बावजूद भी आरोपी को नहीं पकड़ा गया। इसके बाद अभी कुछ दिन पूर्व ही ओढां में जुआ खेलते 7 लोगों को पकडऩे मामले में कोताही बरतने पर एएसआई भाल सिंह व राजकुमार लाइन हाजिर किए गए थे। इसके अलावा क्षेत्र में एनडीपीएस के जितने बड़े मामले पकड़े हैं वे सभी सीआइए स्टाफ ने पकड़े हैं और ओढां पुलिस ने मूकदर्शक की भूमिका निभाई। क्षेत्र के अनेक जागरूक व बुद्धिजीवी लोगों ने एसपी से मांग की है कि सस्पैंड किए गए कर्मचारियों पर जांच बिठाई जाए ताकि भविष्य मेंमें कोताही ना हो।

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