पशुपति नाथ मंदिर : जहां गैर हिंदूओं का जाना है वर्जित

काठमांडू(प्रैसवार्ता)। नेपाल स्थित हिंदूओं के आठ पवित्र स्थलों में से एक भगवान पशुपतिनाथ के भव्य मंदिर में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित  है, मगर बाहर में कोई भी देख सकता है। इस मंदिर का निर्माण पूर्व तीसरी सदी में सोमदेव राजवंश के पशुप्रेक्ष नामक राजा ने करवाया था। इस निर्माण का सही प्रमाणिकता न होने पर मूल पशुपति नाथ मंदिर का कई बार नष्ट होने तथा कई बार पुर्नानिर्माण कारण कहा जा सकता है। भयंकर भूकंप की चपेट में आए नेपाल में दहशत और खौफ का मंजर सभी ओर देखा जा रहा है। स्थानीय जानकी मंदिर के साथ ही कई ओर मंदिर ध्वस्त हो चुके है, मगर पशुपति नाथ मंदिर सुरक्षित है। मंदिर के गर्भ गृह में पंचमुखी शिवलिंग है, जिसका विग्रह दुनियां में कहीं नहीं है। हिंदू पुराणों के अनुसार पशुपति नाथ मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। बताया जाता है कि भगवान शिव यहां पहुंचकर एक चिंकारे का रूप धारण कर सो गए। जब भगवान शिव वाराणसी में नहीं मिले, तो देवताओं ने उन्हें बागमती के किनारे पर पाकर वाराणसी वापिस लाने का प्रयास किया। इसी दौरान चिंकारे के रूप में भगवान शिव ने बागमती नदी के दूसरे किनारे की ओर छलांग लगा दी और इसी के साथ उनके सींग के चार टुकड़े हो गए। कहते है तभी से भगवान पशुपति चतुर्मुख लिंग के रूप में प्रकट हुए। करीब चार हजार वर्ष पुरानी महाभारत कथा के अनुसार,जब पांडव स्वर्ग प्रयाग के लिए हिमालय की ओर जा रहे थे, उस समय उत्तराखंड के केदारनाथ में भगवान शिव ने भैंसे के रूप में पांडवों को दर्शन देकर वह जमीन में समाने लगे, तो भीम ने उनकी पूंछ पकड़ ली थी। यह जगह केदारनाथ के नाम से विख्यात हुई, जबकि नेपाल में धरती से बाहर आकर उनका शीश प्रकट हुआ, जो पशुपतिनाथ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

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